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MP आयुष्मान योजना में गड़बड़ी का खुलासा, गलत भर्ती और फर्जी बिलिंग पर कई अस्पताल निलंबित

07 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP आयुष्मान योजना में गड़बड़ी का खुलासा, गलत भर्ती और फर्जी बिलिंग पर कई अस्पताल निलंबित
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के नाम पर मरीजों के साथ खेल सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि कई अस्पताल ज्यादा पैसा लेने के लिए नियमों को दरकिनार कर रहे थे।


गलत भर्ती और फर्जी क्लेम से खुली पोल

जांच के दौरान सामने आया कि कुछ अस्पताल मरीजों को जानबूझकर गलत श्रेणी में भर्ती कर रहे थे। कई मामलों में मरीजों को गंभीर बताकर ICU में रखा गया, जबकि जरूरत नहीं थी। इतना ही नहीं, गलत पैकेज लगाकर ज्यादा क्लेम भी किए गए—जिससे योजना का दुरुपयोग साफ दिखा।


4.5 करोड़ लोगों की योजना पर उठे सवाल

आयुष्मान योजना करीब 4.5 करोड़ लोगों के इलाज का सहारा है। लेकिन छोटे अस्पतालों को एंट्री लेवल NABH सर्टिफिकेट के आधार पर जोड़ने से गड़बड़ियों के रास्ते खुल गए। नियम के मुताबिक एक साल में फाइनल सर्टिफिकेट लेना जरूरी है, लेकिन कई अस्पताल 3 साल तक एक्सटेंशन लेकर सिस्टम का फायदा उठा रहे थे—जो अब जांच के दायरे में है।


भोपाल-इंदौर समेत बड़े शहरों में कार्रवाई

ताजा कार्रवाई में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कई अस्पतालों की संबद्धता निलंबित की गई है। अधिकारियों ने पाया कि कई अस्पताल बिना पात्रता के इलाज कर रहे थे और डिस्चार्ज रिपोर्ट में बीमारी तक बदल दी जाती थी—जिससे पूरा मामला और गंभीर हो गया।


126 अस्पतालों को नोटिस, हटाए जाएंगे पोर्टल से

सरकार ने सख्ती दिखाते हुए 126 अस्पतालों को नोटिस जारी किया है। इन्हें 15 दिन में फाइनल NABH सर्टिफिकेट जमा करने के लिए कहा गया है। जो अस्पताल यह सर्टिफिकेट नहीं देंगे, उन्हें सीधे आयुष्मान पोर्टल से हटा दिया जाएगा—यानि अब नियमों में ढील नहीं मिलेगी।


छोटे अस्पतालों पर ज्यादा आरोप, बड़े अस्पताल दूरी बना रहे

ज्यादातर गड़बड़ियां छोटे अस्पतालों में सामने आई हैं। ये अस्पताल जरूरत से ज्यादा जांच, ICU और वेंटिलेटर का इस्तेमाल दिखाकर पैसा निकाल रहे थे। वहीं कई बड़े निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से दूरी बना रहे हैं। उनका कहना है कि योजना के पैकेज उनके खर्च से कम हैं, इसलिए वे जटिल सर्जरी करने से बच रहे हैं—जिसका असर मरीजों पर पड़ रहा है।


सरकार सख्त, गुणवत्ता पर अब होगा फोकस

आयुष्मान योजना के अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए अब NABH सर्टिफिकेशन को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। जिन अस्पतालों के पास फुल सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन्हें हटाया जाएगा। साथ ही एंट्री लेवल सर्टिफिकेट वाले अस्पतालों का निरीक्षण भी लगातार जारी रहेगा—ताकि मरीजों के साथ कोई धोखा न हो सके।


मरीजों के भरोसे पर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मरीजों के भरोसे से जुड़ा है। सरकार की सख्ती से अब सिस्टम में सुधार की उम्मीद है, लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या इससे आयुष्मान योजना में लोगों का भरोसा फिर से कायम हो पाएगा?

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