
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की नई पहल शुरू कर दी है। अब गंभीर बीमारी में इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा—सीधे पार्टी ऑफिस से मदद मिलेगी। यही नहीं, घर बैठे डॉक्टरों से सलाह भी संभव होगी।
सेवा प्रकल्प कार्यालय: क्या है नई सुविधा?
भोपाल स्थित बीजेपी प्रदेश कार्यालय में ‘सेवा प्रकल्प कार्यालय’ की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं को तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराना है। उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। यह केंद्र संगठन के भीतर स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है—लेकिन इसकी खासियत यहीं खत्म नहीं होती।
अब हेल्पलाइन से मिलेगा सीधा डॉक्टर कनेक्शन
इस प्रकल्प के तहत दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं—9203597200 और 9203697200। इन नंबरों पर कॉल करके कार्यकर्ता ही नहीं, उनके परिवारजन भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं। यानी अब छोटी-बड़ी बीमारी के लिए अस्पतालों के चक्कर कम लगेंगे—लेकिन असली राहत इससे आगे है।
गंभीर बीमारियों पर खास फोकस
इस सेवा केंद्र में खास तौर पर कैंसर, हृदय रोग और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों को प्राथमिकता दी गई है। मरीजों को न सिर्फ सलाह मिलेगी, बल्कि इलाज की प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों को भी तुरंत सुलझाया जाएगा। साथ ही आयुष्मान भारत योजना से जुड़ी समस्याओं का समाधान भी यहीं किया जाएगा—जो कई लोगों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
खून की जरूरत? तुरंत मिलेगा समाधान
इस पहल की एक और बड़ी खासियत है ‘रक्तदान टीम’। अगर किसी कार्यकर्ता को तत्काल खून की जरूरत पड़ती है, तो यह टीम उनके ब्लड ग्रुप के अनुसार तुरंत व्यवस्था करेगी। आपातकालीन हालात में यह सुविधा कई जिंदगियां बचाने में अहम साबित हो सकती है—और यही इसे खास बनाती है।
‘स्वस्थ कार्यकर्ता, सशक्त संगठन’ की सोच
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न से जोड़ते हुए कहा कि यह योजना ‘सबका साथ, सबका विकास’ के लक्ष्य को मजबूत करेगी। इसका मकसद साफ है—स्वस्थ कार्यकर्ता ही मजबूत संगठन की नींव होते हैं। लेकिन सरकार की योजना यहीं नहीं रुकती।
गांव-गांव पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवाएं
सीएम ने सुझाव दिया कि मेडिकल सेल के जरिए प्रदेश के गांवों में आंखों की जांच के शिविर लगाए जाएं। साथ ही जरूरतमंद लोगों को मुफ्त चश्मा देने की योजना भी जल्द लागू की जा सकती है। अगर यह लागू होता है, तो इसका असर सीधे ग्रामीण स्वास्थ्य पर दिखेगा।
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