
भोपाल। मध्य प्रदेश बोर्ड का 10वीं रिजल्ट आखिरकार जारी हो गया है। इस बार भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बाजी मार ली है। वहीं पन्ना की एक छात्रा ने लगभग परफेक्ट स्कोर के साथ पूरे प्रदेश में टॉप किया है।
73.42% छात्र पास
माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश ने वर्ष 2026 का हाईस्कूल परिणाम घोषित कर दिया है। इस साल कुल 73.42% नियमित छात्र परीक्षा में सफल रहे हैं। परीक्षा में कुल 8,97,061 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें 7,87,733 नियमित और 1,09,328 स्वाध्यायी छात्र थे।
पन्ना की प्रतिभा सिंह बनीं टॉपर
इस बार पन्ना जिले की प्रतिभा सिंह सोलंकी ने इतिहास रच दिया। उन्होंने 500 में से 499 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।
छात्राओं ने फिर मारी बाजी
हर साल की तरह इस बार भी छात्राओं का प्रदर्शन बेहतर रहा। छात्राओं का पास प्रतिशत 77.52% रहा, जबकि छात्रों का 69.31% दर्ज किया गया। यह अंतर साफ दिखाता है कि पढ़ाई में लड़कियां लगातार आगे बढ़ रही हैं।
सरकारी स्कूलों ने किया बेहतर प्रदर्शन
इस बार सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ दिया। शासकीय स्कूलों का रिजल्ट 76.80% रहा, जबकि प्राइवेट स्कूलों का 68.64%। यह आंकड़े शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव और सुधार की ओर इशारा करते हैं।
टॉपर्स लिस्ट में भी छात्राओं का दबदबा
प्रावीण्य सूची में कुल 378 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें 235 छात्राएं और 143 छात्र शामिल हैं।
जिलों का प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे
जिलावार प्रदर्शन में अनूपपुर ने 93.85% के साथ पहला स्थान हासिल किया। वहीं आलीराजपुर 92.14% के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इन जिलों का प्रदर्शन पूरे राज्य के लिए उदाहरण बन सकता है।
2.89 लाख छात्र फेल, नई परीक्षा का मौका
इस साल 2,89,693 छात्र अनुत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। लेकिन उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है। अब पूरक परीक्षा की जगह ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ का प्रावधान किया गया है, जो 7 मई 2026 से शुरू होगी। इसमें फेल, अनुपस्थित या अंक सुधारने वाले छात्र शामिल हो सकेंगे।
ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट
छात्र आधिकारिक वेबसाइट mpbse.mponline.gov.in के अलावा Digilocker और मोबाइल ऐप के जरिए भी अपना रिजल्ट देख सकते हैं। रोल नंबर और आवेदन क्रमांक डालकर आसानी से परिणाम चेक किया जा सकता है—लेकिन ध्यान रहे, सिर्फ आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।
नकल के भी सामने आए मामले
परीक्षा के दौरान 47 नकल के मामले भी सामने आए, जो चिंता का विषय है। हालांकि, बोर्ड ने साफ किया है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी रखी गई थी—ताकि परिणाम निष्पक्ष रहे।
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