
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी सदन के बेहतर संचालन के लिए जल्द ही मुख्य सचेतक की नियुक्ति कर सकती है। भोपाल में इस अहम पद को लेकर पार्टी स्तर पर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं और सरकार इसे राजनीतिक संतुलन साधने के बड़े कदम के रूप में देख रही है। बजट सत्र नजदीक आते ही यह फैसला और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
भोपाल में शुरू हुआ मंथन, नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच इस मुद्दे पर लगातार चर्चा चल रही है। वर्तमान में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सदन में मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, लेकिन नए चेहरे की नियुक्ति से जिम्मेदारियों का बंटवारा आसान हो सकता है। पार्टी मानती है कि मुख्य सचेतक के जरिए विधानसभा में अनुशासन और रणनीति दोनों मजबूत होती हैं।
ये वरिष्ठ विधायक माने जा रहे प्रमुख दावेदार
अगर नियुक्ति होती है तो कुछ अनुभवी विधायकों के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और नर्मदापुरम विधायक सीताशरण शर्मा, पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव और अजय विश्नोई का नाम प्रमुख तौर पर चर्चा में है। तीनों नेताओं के पास लंबे समय का संसदीय अनुभव है और वे सदन की कार्यवाही को बेहतर तरीके से संभालने की क्षमता रखते हैं। हालांकि पार्टी किसी अन्य वरिष्ठ विधायक पर भी अंतिम सहमति बना सकती है।
मुख्य सचेतक की भूमिका क्यों मानी जाती है अहम
मुख्य सचेतक का पद केवल औपचारिक नहीं बल्कि बेहद जिम्मेदारी भरा होता है। सदन की कार्यवाही के दौरान पार्टी विधायकों को एकजुट रखना, अनुशासन बनाए रखना और मतदान के समय पार्टी लाइन का पालन करवाना इसकी प्रमुख जिम्मेदारी होती है। यह पद पार्टी नेतृत्व और विधायकों के बीच समन्वय का काम करता है और कई बार मुख्यमंत्री या विपक्ष के नेता के प्रमुख सलाहकार की भूमिका भी निभाता है। इसी वजह से आमतौर पर यह जिम्मेदारी किसी अनुभवी नेता को दी जाती है।
16 फरवरी से शुरू होगा मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र
मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा। 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा राज्य का बजट पेश करेंगे, जिसके बाद सदन में विस्तृत चर्चा होगी। फिलहाल विधानसभा में बीजेपी के 165 विधायक, कांग्रेस के 65 विधायक और भारतीय आदिवासी पार्टी का एक विधायक मौजूद है। ऐसे में मुख्य सचेतक की नियुक्ति सरकार के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
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