
भोपाल। मध्यप्रदेश में उन शहरों के लिए भवन निर्माण के नियमों में बदलाव की तैयारी है, जहां अभी मास्टर प्लान लागू नहीं है। प्रस्तावित संशोधनों में निर्माण की प्रक्रिया आसान करने, ऊंची इमारतों को प्रोत्साहित करने और कुछ क्षेत्रों में अनलिमिटेड FAR की सुविधा देने का प्रावधान शामिल है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 अक्टूबर को इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में संशोधित भूमि विकास नियमों का ड्राफ्ट जारी कर सकते हैं। इसके बाद एक महीने तक आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां मांगी जाएंगी। सुनवाई पूरी होने के बाद नियमों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।
2012 के नियमों में व्यापक बदलाव, 50 से ज्यादा संशोधन होंगे एक जगह
मध्यप्रदेश में भूमि विकास नियमों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है। वर्ष 2012 में बनाए गए मौजूदा नियमों में अब तक 50 से अधिक संशोधन हो चुके हैं, जिससे आम लोगों के लिए निर्माण संबंधी प्रावधान समझना मुश्किल हो गया है।
नए ड्राफ्ट में पुराने संशोधनों को एक ही जगह समाहित कर भाषा को सरल बनाने की तैयारी है। उद्देश्य यह है कि नागरिक खुद नियमों को समझकर अपने मकान का नक्शा और निर्माण योजना तैयार कर सकें तथा आर्किटेक्ट या कंसल्टेंट पर निर्भरता कम हो।
भवन निर्माण के पांच प्रमुख मानकों की गणना होगी आसान
जिन शहरों में मास्टर प्लान लागू नहीं है, वहां भवन की ऊंचाई, निर्माण क्षेत्र, खुली जगह, हरियाली और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान भूमि विकास नियमों के आधार पर तय होते हैं।
प्रस्तावित बदलावों में भवन निर्माण के पांच प्रमुख मानकों की गणना और उपयोग की प्रक्रिया सरल बनाने पर जोर है:
* फ्रंट मार्जिन: भवन के सामने छोड़ी जाने वाली जगह।
* साइड और रियर मार्जिनल ओपन स्पेस: भवन के किनारों और पीछे की खुली जगह।
* ग्राउंड कवरेज: भूखंड पर भवन के निर्माण से घिरने वाला क्षेत्र।
* भवन की ऊंचाई: इमारत की निर्धारित ऊंचाई से जुड़े नियम।
* FAR (फ्लोर एरिया रेशियो): भूखंड के क्षेत्रफल के अनुपात में कुल निर्मित क्षेत्र की सीमा।
30 मीटर की जगह 45 से 60 मीटर तक विशेष अनुमति का प्रस्ताव
नए नियमों में विशेष अनुमति के लिए निर्धारित ऊंचाई की सीमा मौजूदा 30 मीटर से बढ़ाकर 45 से 60 मीटर तक करने का प्रस्ताव है। इससे चौड़ी सड़कों के आसपास इमारत बनाने के लिए बार-बार विशेष अनुमति लेने की जरूरत कम हो सकती है।
इसके साथ ही FAR की अधिकतम सीमा 3 से बढ़ाकर 4 करने की तैयारी है। इसके लिए कुछ शर्तें लागू होंगी। चुनिंदा क्षेत्रों में अनलिमिटेड FAR देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है, जिससे उपलब्ध जमीन पर ज्यादा निर्माण किया जा सकेगा।
छोटे शहरों में भी बन सकेंगी बहुमंजिला इमारतें
सरकार शहरों के विस्तार के लिए वर्टिकल डेवलपमेंट यानी ऊंची इमारतों के निर्माण को बढ़ावा देना चाहती है। आबादी बढ़ने और जमीन सीमित होने के कारण क्षैतिज विस्तार के लिए आसपास की कृषि भूमि पर दबाव बढ़ रहा है।
ऊंची इमारतों के विकल्प से कम जमीन पर अधिक आवासीय और व्यावसायिक सुविधाएं विकसित करने का अवसर मिल सकता है। प्रस्तावित अनलिमिटेड FAR की व्यवस्था भी इसी दिशा में एक कदम है।
सरकार किन छह उद्देश्यों से बदल रही है नियम?
भूमि विकास नियमों में संशोधन के पीछे कई प्रमुख लक्ष्य रखे गए हैं:
* भवन निर्माण के प्रावधानों को आम नागरिकों के लिए सरल बनाना।
* मास्टर प्लान से वंचित शहरों में अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण करना।
* जमीन का बेहतर उपयोग करते हुए वर्टिकल डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करना।
* भवनों में अग्निसुरक्षा और आधुनिक सुरक्षा मानकों को शामिल करना।
* नई निर्माण तकनीकों और उनसे जुड़ी सुविधाओं के लिए प्रावधान तैयार करना।
* ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत निवेश और निर्माण की प्रक्रिया आसान बनाना।
सुझाव और आपत्तियों के बाद लागू होंगे नए नियम
इंदौर के अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में ड्राफ्ट जारी होने के बाद प्रस्तावित बदलावों पर एक महीने तक सुझाव और आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद संबंधित पक्षों की सुनवाई होगी और नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
ध्यान दें: ये प्रावधान अभी प्रस्तावित हैं। विशेष अनुमति की सीमा, FAR में बढ़ोतरी और अनलिमिटेड FAR की व्यवस्था को अंतिम नियमों में शामिल किए जाने के बाद ही उनकी वास्तविक लागू होने वाली शर्तें स्पष्ट होंगी।
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