
भोपाल। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और सरकारी शिक्षा संस्थानों की सुविधाएं बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर के लिए नई सरकारी कंपनी बनाने के साथ स्कूलों की परिवहन व्यवस्था और शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया।
गुरुवार सुबह मंत्रालय में हुई बैठक की शुरुआत वंदे मातरम गायन से हुई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मीडिया को फैसलों की जानकारी दी। खास बात यह रही कि पत्रकारों को बैठक समाप्त होने के बाद फोन करके बुलाया गया था। तीन दिन पहले हुई विशेष कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को शामिल नहीं किया गया था।
जबलपुर से इंदौर तक औद्योगिक विकास की योजना
राज्य सरकार ने जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले कॉरिडोर को औद्योगिक विकास की योजना के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य महाकौशल सहित प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों में उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को विस्तार देना है।
परियोजना के संचालन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी गठित की गई है। यह कंपनी इकोनॉमिक कॉरिडोर के तौर पर काम करेगी और इसका पूरा स्वामित्व राज्य शासन के पास रहेगा।
सरकार ने दिए 100 करोड़ रुपये
कॉरिडोर के शुरुआती काम के लिए राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। परियोजना से जुड़े फैसलों में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री स्वयं इसकी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को अपनी अन्य कंपनियों के संचालन से जो अनुभव और विशेषज्ञता मिली है, उसका इस्तेमाल भी इस परियोजना में किया जाएगा। संबंधित विभागों के बीच तालमेल के जरिए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना है।
10 हजार एकड़ तक जमीन विकसित करने की तैयारी
प्रस्तावित कॉरिडोर का दायरा केवल सड़क या परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
जबलपुर, नरसिंहपुर से रायसेन तक के इलाके में पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों के विकास की संभावनाएं बताई गई हैं। यहां सड़क, बिजली, पानी और विमानन से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिनका लाभ उद्योगों को मिल सकता है।
परियोजना के पहले चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ भूमि विकसित करने की योजना है। सरकार के अनुसार, इन सुविधाओं से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और संचालन में मदद मिल सकती है।
मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ से अधिक निवेश का अनुमान
कॉरिडोर से जुड़ी योजना में निवेश और रोजगार सृजन के बड़े लक्ष्य रखे गए हैं। मुख्यमंत्री ने इसके संभावित आर्थिक प्रभाव का ब्यौरा देते हुए कहा कि मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने का अनुमान है।
इस अवधि से जुड़े अनुमान के अनुसार, करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। यानी कुल मिलाकर लगभग 3 लाख रोजगार अवसरों की संभावना जताई गई है।
आगामी तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और छह लाख से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी व्यक्त की गई है। ये सरकार की ओर से बताए गए अनुमान हैं, वास्तविक उपलब्धियां निवेश और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगी।
स्कूलों की बस व्यवस्था के लिए 241 करोड़ रुपये मंजूर
कैबिनेट ने विद्यार्थियों के लिए परिवहन सुविधाएं बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगभग 241 करोड़ रुपये की योजना को स्वीकृति दी है। इस व्यवस्था में बसों का संचालन और रखरखाव जिला स्तर पर कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अलग-अलग जिलों में स्थानीय परिस्थितियों और दरों में अंतर होने के कारण परिवहन व्यवस्था की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपी गई है। इससे जिलों को अपनी जरूरत के अनुसार बसों के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था करने का अवसर मिलेगा।
योजना के दायरे में जनजातीय क्षेत्रों के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और दूसरे क्षेत्रों के विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया है।
शैक्षणिक संस्थानों के कायाकल्प पर 3,000 करोड़ रुपये
स्कूल शिक्षा से जुड़े एक अन्य फैसले में सरकार ने करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। इसका उपयोग सांदीपनि स्कूलों के साथ सरकारी स्कूलों, छात्रावासों, पुस्तकालयों, आवासीय संस्थानों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस काम में विधायक और सांसद निधि सहित अन्य मदों से मिलने वाली राशि को भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों की सुविधाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार करना है।
कैबिनेट के फैसलों में उद्योग और शिक्षा पर जोर
गुरुवार की बैठक में सामने आए प्रस्तावों में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, रोजगार के अवसर तैयार करने, विद्यार्थियों के आवागमन को सुविधाजनक बनाने और सरकारी शिक्षण संस्थानों के विकास पर ध्यान दिया गया।
औद्योगिक कॉरिडोर के लिए कंपनी गठन और शुरुआती बजट से परियोजना को आगे बढ़ाने की रूपरेखा तय की गई है। दूसरी तरफ, स्कूल परिवहन और संस्थागत विकास के लिए स्वीकृत राशि का असर संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद सामने आएगा।
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