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कैंसर मरीजों को बड़ा झटका! MP में कीमोथेरेपी का खर्च 50% तक बढ़ा, हर साइकिल पर बढ़ेगा बोझ

20 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
कैंसर मरीजों को बड़ा झटका! MP में कीमोथेरेपी का खर्च 50% तक बढ़ा, हर साइकिल पर बढ़ेगा बोझ
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में कैंसर मरीजों के लिए इलाज अब पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन जैसी प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं की कीमतों में 10% से 50% तक बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इसका सीधा असर मरीजों की जेब पर पड़ेगा।


हर कीमो साइकिल पर बढ़ेगा हजारों रुपए का खर्च

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दवाओं का उपयोग ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। अब एक कीमोथेरेपी साइकिल पर मरीजों को करीब 2 से 3 हजार रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। जिन मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, उनके इलाज का कुल खर्च हजारों रुपए बढ़ जाएगा।


अस्पतालों में खत्म हुईं जरूरी दवाएं

युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण प्लैटिनम-बेस्ड कीमो दवाओं की उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हुई है। शहर के कई कैंसर अस्पतालों में कार्बोप्लैटिन और सिस्प्लैटिन का स्टॉक खत्म हो चुका है। हालांकि दवा कंपनियों ने उत्पादन फिर शुरू कर दिया है, लेकिन मांग के अनुसार सप्लाई सामान्य होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।


7 तरह के कैंसर मरीजों पर असर

इन दवाओं का इस्तेमाल 7 प्रमुख प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की कमी और कीमत बढ़ने का असर हर 100 में से लगभग 70 मरीजों पर पड़ सकता है। कई अस्पतालों में डॉक्टरों को इलाज के स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल में बदलाव करना पड़ रहा है।


डॉक्टरों ने क्या कहा?

मुंबई के कामा एवं एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे के अनुसार, प्लैटिनम-बेस्ड दवाओं की भारी कमी से कैंसर मरीजों के इलाज पर असर पड़ा है। वहीं भोपाल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू ने बताया कि सिस्प्लैटिन पिछले 20-30 वर्षों से सबसे भरोसेमंद और किफायती दवा मानी जाती है। इसका विकल्प इम्यूनोथेरेपी है, जिसका खर्च लाखों रुपए तक पहुंच सकता है।


सरकार ने क्यों बढ़ाई कीमत?

केंद्र सरकार ने उत्पादन लागत बढ़ने और दवाओं की लगातार कमी को देखते हुए इनकी कीमत बढ़ाने की मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे दवा कंपनियां उत्पादन बढ़ा सकेंगी और बाजार में सप्लाई सामान्य होने में मदद मिलेगी। हालांकि, तब तक मरीजों को महंगे इलाज और सीमित उपलब्धता की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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