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MP CBG Project: 15 शहरों के कचरे से बनेगी गैस, 282 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट शुरू

19 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP CBG Project: 15 शहरों के कचरे से बनेगी गैस, 282 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट शुरू
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में शहरों से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ डंपिंग ग्राउंड तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार 15 नगरीय निकायों में कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पहले चरण में 8 प्रोजेक्ट शुरू होंगे, जिन पर ₹282.44 करोड़ की लागत आएगी।


रोज 1055 टन कचरे से बनेगी 40 टन CBG

नगरीय विकास विभाग के अनुसार इन परियोजनाओं में प्रतिदिन 1055 टन ठोस कचरे का उपयोग किया जाएगा। इससे हर दिन करीब 40 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन होगा। तैयार गैस का उपयोग नगरीय निकाय अपनी जरूरतों के लिए करेंगे, जबकि अतिरिक्त गैस बाजार में बेचकर राजस्व भी कमाया जाएगा।


PPP मॉडल पर तैयार होंगे प्लांट

ये सभी परियोजनाएं स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित की जा रही हैं। डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल के तहत प्लांट बनाए जाएंगे। वहीं, कचरे का संग्रहण और परिवहन संबंधित नगरीय निकायों की जिम्मेदारी होगी।


इन शहरों में लगेंगे CBG प्लांट

राज्य में बुरहानपुर, खंडवा, मुरैना और सागर में क्लस्टर मॉडल पर परियोजनाएं विकसित होंगी, जहां आसपास के शहरों का कचरा भी प्रोसेस किया जाएगा। वहीं देवास, रतलाम, उज्जैन और ग्वालियर में स्वतंत्र CBG प्लांट स्थापित किए जाएंगे।


सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी रफ्तार

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने घरेलू कचरा प्रबंधन की निगरानी के लिए 6 सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट एम्पॉवर्ड मॉनीटरिंग कमेटी (SCMC) गठित की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लीगेसी वेस्ट के निपटान में तय समय-सीमा का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।


कलेक्टरों को मिली अहम जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जिलों में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन की निगरानी की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपी गई है। उन्हें अवैध डंपिंग और कचरा परिवहन की पहचान कर दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्रत्येक जिले की वेबसाइट पर कचरा प्रबंधन की प्रगति और शिकायतों के लिए अलग पेज बनाने को भी कहा गया है।


कचरे से ऊर्जा और कमाई, दोनों होंगे

इन परियोजनाओं से लैंडफिल पर निर्भरता कम होगी, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा और शहरों में कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा। इसके अलावा कंपोस्ट और RDF के व्यावसायिक उपयोग से भी नगरीय निकायों को अतिरिक्त आय मिलेगी। इससे सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन भी मजबूत होगा।


5 परियोजनाओं का टेंडर पूरा, बाकी प्रक्रिया जारी

नगरीय विकास विभाग ने देवास, रतलाम, मुरैना, बुरहानपुर और खंडवा की 5 CBG परियोजनाओं के टेंडर पूरे कर कंपनियों को कार्य आवंटित कर दिया है। वहीं उज्जैन, ग्वालियर और सागर की परियोजनाओं के टेंडर में संशोधन के बाद प्रक्रिया जारी है। टेंडर पूरा होने के बाद 8 माह में निर्माण और 12 माह में कमीशनिंग का लक्ष्य रखा गया है। सफल परीक्षण के 2 माह बाद प्लांट का व्यावसायिक संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

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