
बेंगलुरु। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को बेंगलुरु में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) ग्वालियर में निवेश के लिए तकनीकी उद्यमियों और निवेशकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पिछले पौने तीन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर आया है।
बैठक में ग्वालियर के TMZ को टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार ने जुलाई 2026 में TMZ के लिए MoU किया था और दिल्ली-मुंबई के बाद बेंगलुरु में निवेशकों से संपर्क किया गया।
ग्वालियर TMZ में पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि TMZ में डिजाइन, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट तक की गतिविधियों को एक ही औद्योगिक परिसर में जोड़ने का लक्ष्य है।
यहां सिम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन उपकरण, 5G और 6G उपकरण, ऑप्टिकल फाइबर और IoT से जुड़े उत्पादों के निर्माण की योजना है।
24 कंपनियां शुरू कर चुकी हैं आवेदन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री के अनुसार दिल्ली और मुंबई में आयोजित निवेशक सम्मेलनों में क्रमशः करीब 3,500 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए थे।
इन दोनों सम्मेलनों से लगभग 18,000 रोजगार अवसर बनने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 24 कंपनियों ने TMZ में इकाइयां स्थापित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है।
बेंगलुरु में 700-800 करोड़ के प्रस्तावों पर चर्चा
बेंगलुरु में हुई बातचीत में ग्वालियर TMZ के लिए करीब 700-800 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इनमें टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिजाइन जैसे क्षेत्र शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार निवेश को सुरक्षित, सफल और गति देने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगी।
210 करोड़ के GCC से लेकर चिप डिजाइन तक प्रस्ताव
बैठक में अलग-अलग कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेश को लेकर प्रस्ताव रखे। थोलोन्स के चेयरमैन एवं सीईओ अविनाश वशिष्ठ और अंकिता वशिष्ठ ने 210 करोड़ रुपये के निवेश से GCC यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की।
असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ शिवकुमार पी.आर. ने 100 करोड़ रुपये के चिप डिजाइन हाउस का प्रस्ताव रखा। पहले चरण में 25 करोड़ रुपये लगाने की बात कही गई।
कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज के संस्थापक एवं सीईओ पंकज गर्ग ने चिप डिजाइन सर्विसेज के लिए कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति जताई।
डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए करीब 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की।
निवेशकों के लिए 'पहले आओ-पहले पाओ' का मॉडल
डॉ. यादव ने कहा कि TMZ के पहले चरण में भूमि सीमित है। इसलिए शुरुआती चरण में आने वाले निवेशकों को 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर विशेष लाभ मिलने की बात उन्होंने कही।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नाममात्र दर पर विकसित भूमि, रियायती बिजली-पानी और साझा टेस्टिंग लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था निवेशकों के लिए रखी गई है।
MP की नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर CM का जोर
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति, मजबूत बुनियादी ढांचे और सरप्लस बिजली को निवेश के लिए प्रमुख आधार बताया। उनका कहना था कि प्रदेश में पारदर्शी नीतियां और सिंगल विंडो व्यवस्था लागू है।
उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 25 से अधिक सेक्टर-विशेष निवेश अनुकूल नीतियां लागू की गई हैं। इनका उद्देश्य उद्योगों की स्थापना और संचालन को आसान बनाना है।
पिछले 9 महीने में करीब 15 विनिर्माण इकाइयां
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले 9 महीनों में मध्यप्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी करीब 15 विनिर्माण इकाइयां स्थापित हुई हैं। ट्रांसफॉर्मर, टेलीकॉम, हेल्थकेयर, टेक्सटाइल, ऑप्टिकल फाइबर केबल और ऑटोमोबाइल पार्ट्स सहित कई क्षेत्रों में प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की बात उन्होंने रखी।
धार और मोहासा-बाबई का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने निवेशकों के सामने राज्य के अन्य औद्योगिक पार्कों का उदाहरण भी रखा। उनके अनुसार धार में 2,000 एकड़ के पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क का भूमि-पूजन 2025 में हुआ और उसी दौरान पार्क के सभी प्लॉट बुक हो गए।
मोहासा-बाबई के नवकरणीय ऊर्जा उपकरण पार्क के पहले, दूसरे और तीसरे चरण पूरी तरह बुक होने के बाद चौथे चरण पर काम शुरू होने की जानकारी भी दी गई। पीथमपुर, अवंतिका और विक्रम उद्योगपुरी का भी उन्होंने उल्लेख किया।
'डिजाइन इन इंडिया' से 'मेक फॉर द वर्ल्ड' तक लक्ष्य
डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में 'डिजाइन इन इंडिया', 'मेक फॉर इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम उपकरण निर्माण के साथ रिसर्च और इनोवेशन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। प्रदेश की नीतियों में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन का प्रावधान बताया गया।
बेंगलुरु के टेक इकोसिस्टम से MP को जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार का समन्वय प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। निवेशकों की जरूरत और अपेक्षाओं के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा निवेश संबंधी मुद्दों के त्वरित निराकरण की बात भी उन्होंने कही।
दिल्ली-मुंबई के बाद बेंगलुरु पर नजर
जुलाई 2026 में दूरसंचार विभाग और मध्यप्रदेश सरकार के बीच TMZ स्थापना को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद अगस्त में दिल्ली और मुंबई में निवेशक सम्मेलन आयोजित किए गए।
अब बेंगलुरु की बैठक के जरिए तकनीकी कंपनियों, टेलीकॉम उद्योग और निवेशकों को ग्वालियर TMZ से जोड़ने की कोशिश की गई है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपयुक्त समय बताते हुए राज्य की नीतियों और औद्योगिक सुविधाओं की जानकारी साझा की।
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