
भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कामकाज की जमीनी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिलों में रात्रि विश्राम का सिलसिला शुरू किया है। अब उनके दौरे के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए संबंधित जिले के अधिकारियों को 48 घंटे का समय दिए जाने की बात सामने आई है।
सरकार और संगठन पहले भी मंत्रियों व विधायकों को गांवों में रात बिताने की जिम्मेदारी दे चुके हैं, लेकिन इस पहल पर व्यापक अमल नहीं हो पाया। अब मुख्यमंत्री खुद जिलों में रुककर लोगों से संवाद और कामकाज का फीडबैक लेने पर जोर दे रहे हैं।
बालाघाट के जंगलों से बड़वानी तक CM का दौरा
डॉ. मोहन यादव हाल ही में बालाघाट के जंगलों में रात बिता चुके हैं। रविवार को उन्होंने बड़वानी में रात्रि विश्राम किया। इससे पहले बैतूल के कुकरू खामला में भी रात गुजारी थी।
बैतूल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने रात में आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ बैठक की थी। अगली सुबह उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी बातें सुनी थीं।
मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलकर जिलों में रुकने का उद्देश्य सत्ता और संगठन के कामकाज की जानकारी लेना, जनता से सीधे बातचीत करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। रात्रि विश्राम जिला मुख्यालय या ग्रामीण क्षेत्र में हो सकता है।
मंत्रियों के सामने जिम्मेदारियों के बीच समय निकालने की चुनौती
सत्ताधारी दल ने मंत्रियों को उनके प्रभार वाले जिलों में और विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में रात बिताने की जिम्मेदारी दी थी। पिछले ढाई साल में संगठन और सरकार इस रणनीति पर दो बार काम कर चुके हैं, लेकिन इसका पालन कुछ ही जनप्रतिनिधियों ने किया।
एक मंत्री ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर अपनी परेशानी साझा की। उनके मुताबिक, गांवों में रुकने की जिम्मेदारी के साथ प्रदेश भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनने की ड्यूटी भी दी गई है।
मंत्रियों को हर सप्ताह कैबिनेट बैठक में शामिल होना पड़ता है। प्रभार वाले जिलों का दौरा करने के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के सुख-दुख में भागीदारी भी निभानी होती है।
मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा चुनौतियों के कारण कई बार गृह जिले और गृह विधानसभा क्षेत्र से बाहर जाना मुश्किल हो जाता है। इन जिम्मेदारियों के बीच गांवों में रात्रि विश्राम के लिए समय निकालना उनके सामने बड़ी चुनौती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद 48 घंटे में कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की बैठकों में मिलने वाले फीडबैक और लोगों से संवाद के दौरान सामने आने वाली समस्याओं पर तेजी से काम करने के निर्देश हैं।
जिस जिले में डॉ. यादव रुकेंगे, वहां सामने आई कमियों को 48 घंटे के भीतर दूर करने पर जोर रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों और प्रशासनिक खामियों को केवल दर्ज करने के बजाय उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई कराना है।
छह महीने पहले अधिकारियों को भी मिले थे निर्देश
राज्य सरकार ने करीब छह महीने पहले कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर कामकाज देखने तथा रात बिताने के निर्देश दिए थे।
शुरुआत में कुछ कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और अन्य अधिकारी मैदान में उतरे। कई अधिकारियों ने गांवों में रात्रि विश्राम भी किया, लेकिन यह पहल कुछ जगहों पर औपचारिकता तक सिमट गई।
खटिया पर सोने वाले IAS की तस्वीर भी हुई थी वायरल
उज्जैन के एक IAS अधिकारी ने गांव में खटिया डालकर रात बिताई थी। उनकी तस्वीर भी खींची गई, लेकिन वायरल होने के बाद पता चला कि सोते समय उन्होंने चश्मा तक नहीं उतारा था।
यह मामला ग्रामीण दौरों और रात्रि विश्राम की औपचारिकता को लेकर चर्चा में आया था। अब मुख्यमंत्री के खुद जिलों में रुकने से प्रशासनिक कामकाज और जनता से संवाद पर कितना असर पड़ता है, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।
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