
भोपाल। मध्यप्रदेश में 15 सितंबर के बाद दो दिवसीय कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित है, जिसमें संभागायुक्तों और कलेक्टरों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा होगी। बैठक में 105 बिंदुओं पर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं समेत जिलेवार प्रगति परखी जाएगी।
इस बार अधिकारियों के मौजूदा काम के साथ उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और नवाचारों का भी आकलन होगा। प्रदर्शन कमजोर पाए जाने वाले अधिकारियों के तबादले और पिछड़े जिलों के कलेक्टरों से जवाब-तलब की स्थिति बन सकती है।
अधिकारियों को देना होगा काम का पूरा प्रजेंटेशन
कॉन्फ्रेंस में संभागायुक्तों और कलेक्टरों को अपने क्षेत्र में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। इसमें विकास कार्यों के साथ किए गए नवाचारों का ब्योरा भी शामिल रहेगा।
इसके अलावा अधिकारियों को अपने कार्यकाल में किए गए कामों पर अलग प्रस्तुति देनी होगी। इन दोनों स्तरों की रिपोर्ट को आगे उनकी अगली पदस्थापना तय करने में आधार बनाया जाएगा।
अक्टूबर 2025 की बैठक के निर्देशों की भी होगी जांच
मौजूदा कलेक्टरों के लिए पिछली कॉन्फ्रेंस में मिले निर्देशों का पालन भी महत्वपूर्ण रहेगा। 7 और 8 अक्टूबर 2025 को हुई बैठक में जिलों के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए थे।
प्रदेश स्तर के कुछ कार्यों की जिम्मेदारी भी सामूहिक रूप से अधिकारियों को सौंपी गई थी। अब समीक्षा में देखा जाएगा कि:
किन निर्देशों पर प्रभावी कार्रवाई हुई।
किन जिम्मेदारियों को समय पर पूरा किया गया।
किन कामों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
नए मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की पहली कॉन्फ्रेंस
यह बैठक मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के कार्यकाल की पहली कमिश्नर-कलेक्टर कॉन्फ्रेंस होगी। जिले की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर अधिकारियों के लिए नए लक्ष्य तैयार किए जा रहे हैं।
इन प्रस्तावित लक्ष्यों को लेकर मुख्यमंत्री के साथ अलग से चर्चा होने की संभावना भी है। बैठक में नए लक्ष्य तय होने के बाद अधिकारियों से उनके क्रियान्वयन की अपेक्षा रहेगी।
कमजोर प्रदर्शन पर तबादले की संभावना
कॉन्फ्रेंस का एक अहम हिस्सा अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन रहेगा। जिन संभागों या जिलों में कामकाज अपेक्षानुसार नहीं मिला, वहां संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
पिछड़े जिलों के कलेक्टरों को अपने जिले की स्थिति और अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारणों का जवाब देना होगा। प्रदर्शन के आधार पर कुछ अधिकारियों की अगली पदस्थापना प्रभावित हो सकती है।
हटाए जा चुके अफसरों का रिकॉर्ड भी खुलेगा
इस बार एक अलग पहल के तहत उन संभागायुक्तों और कलेक्टरों के कार्यकाल की भी समीक्षा होगी, जिन्हें संबंधित संभाग या जिलों से हटाया जा चुका है।
हाल में हटाए गए अधिकारियों के कार्यकाल में हुए कामों पर भी चर्चा प्रस्तावित है। इसका मकसद उनकी कार्यप्रणाली और उपयोगिता का आकलन करना है। यही पहल इस कॉन्फ्रेंस को पिछली बैठकों से अलग बनाती है।
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