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MP में 2 लाख मरीजों को आंखों की रोशनी का इंतजार, हर साल 6 हजार कॉर्निया की जरूरत लेकिन मिलते सिर्फ 1500

10 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
यह AI जनरेटेड फोटो है।

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Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कॉर्निया की उपलब्धता बन गई है। प्रदेश में हर साल करीब 6,000 कॉर्निया की जरूरत होती है, लेकिन जागरूकता और संसाधनों की कमी के कारण केवल 1,500 कॉर्निया ही उपलब्ध हो पाते हैं। इसका सीधा असर हजारों मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें नई रोशनी के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है।


2 लाख से ज्यादा मरीज वेटिंग लिस्ट में

स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2 लाख से अधिक मरीज कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। हर साल इस सूची में 1,500 से 1,800 नए मरीज जुड़ रहे हैं। कॉर्निया की सीमित उपलब्धता के कारण करीब 75 प्रतिशत मरीजों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा।


बड़े शहरों तक सीमित है सुविधा

फिलहाल कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा केवल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में उपलब्ध है। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हर साल सबसे ज्यादा, लगभग 100 कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए सोटो ने अब जिला अस्पतालों तक यह सुविधा पहुंचाने की योजना बनाई है।


15 जिलों में शुरू होंगे नए कॉर्निया सेंटर

सोटो ने पहले चरण में इंदौर और उज्जैन संभाग के 15 जिलों में विशेष कॉर्निया कलेक्शन और ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी समय पर इलाज और प्रत्यारोपण की सुविधा मिल सकेगी।


नेत्रदान को लेकर जागरूकता सबसे बड़ी चुनौती

एम्स भोपाल के नेत्र रोग विभाग की प्रमुख डॉ. भावना शर्मा के अनुसार, समाज में नेत्रदान को लेकर फैली भ्रांतियां आज भी सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन मरीजों को रोशनी मिल सकती है, क्योंकि दोनों आंखों के कॉर्निया अलग-अलग मरीजों में प्रत्यारोपित किए जाते हैं।


मृत्यु के 6 घंटे के भीतर जरूरी होता है नेत्रदान

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की मृत्यु के 6 घंटे के भीतर कॉर्निया सुरक्षित निकालना जरूरी होता है। ऐसे में परिजनों को तुरंत नजदीकी आई बैंक या अधिकृत अस्पताल को सूचना देनी चाहिए। डॉक्टरों के पहुंचने तक आंखों पर साफ और गीला कपड़ा रखना, पंखा बंद करना और सिर को थोड़ा ऊंचा रखना कॉर्निया सुरक्षित रखने में मदद करता है।


हर जिले में सुविधा विकसित करने की जरूरत

सोटो के पूर्व संचालक डॉ. संजय दीक्षित का कहना है कि प्रदेश की जरूरत का केवल 20 से 25 प्रतिशत कॉर्निया ही दान के जरिए उपलब्ध हो पाता है। वहीं सोटो की कॉर्निया ट्रांसप्लांट इंचार्ज डॉ. श्वेता वालिया ने कहा कि जिला अस्पतालों तक कॉर्निया कलेक्शन और ट्रांसप्लांट सुविधा पहुंचाने के साथ-साथ नेत्रदान को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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