
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को स्थानीय जरूरतों और सरकारी प्राथमिकताओं से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास से जुड़े कामों का असर बढ़ाना है।
CSR कॉन्क्लेव में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने कहा कि निवेश केवल गतिविधियां पूरी करने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके परिणामों की निगरानी और माप भी हो।
जरूरत के हिसाब से तय होगा CSR निवेश
मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश की अलग-अलग भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए CSR के लिए एक ही मॉडल लागू करने के बजाय स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार करनी होंगी।
उन्होंने सरकारी प्राथमिकताओं को कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता और संसाधनों से जोड़ने पर जोर दिया। उनके अनुसार जरूरत की पहचान, प्राथमिकता तय करना, मॉनिटरिंग और परिणामों का आकलन CSR साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से होने चाहिए।
पंखुड़ी पोर्टल से साझेदारी को मिलेगा आधार
मंत्री ने राष्ट्रीय CSR पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश के पंखुड़ी पोर्टल को भी महत्वपूर्ण बताया। इन प्लेटफॉर्म के जरिए जरूरत वाले क्षेत्रों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा की जा सकती है।
इससे सरकार, कॉरपोरेट संस्थानों, विकास एजेंसियों और अन्य संगठनों के बीच योजनाबद्ध साझेदारी विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
MP में ₹1,195.34 करोड़ CSR खर्च
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने CSR के कानूनी ढांचे की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश में करीब ₹1,195.34 करोड़ CSR पर खर्च किए गए। इसमें जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से संबंधित क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत रही।
जरूरत और कंपनियों की रुचि का होगा मिलान
शुक्ला ने राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग की आवश्यकता बताई। साथ ही CSR कंपनियों की रुचि और विशेषज्ञता को सरकारी प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने CSR पोर्टल को मजबूत करने और सरकारी विभागों, कंपनियों तथा अन्य साझेदार संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही।
61 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंच
महिला एवं बाल विकास आयुक्त संदीप जी. आर. ने CSR को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ने की संभावनाएं बताईं।
मध्यप्रदेश में करीब 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए 61 लाख से अधिक संवेदनशील और जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों पर काम किया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों में CSR की भूमिका
CSR के जरिए आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को मजबूत बनाने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार नए प्रयोग करने की संभावनाएं बताई गईं।
आयुक्त ने शुरुआती 1000 दिनों और जीवन के पहले 6 वर्षों को बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवधि बताया। उन्होंने इस क्षेत्र में सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया।
स्थानीय भोजन से पोषण सुधारने पर जोर
संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण मॉडल का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ पहल का उल्लेख किया।
सहजन की पत्तियों और मिलेट्स जैसी स्थानीय पौष्टिक सामग्री को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करके स्थानीय खान-पान के अनुरूप मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।
MP के CSR निवेश में बढ़ोतरी की गुंजाइश
कॉन्क्लेव में बताया गया कि देश की आबादी में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय CSR व्यय में राज्य का हिस्सा लगभग 1.44 प्रतिशत है।
श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) की पहलों को सरकारी प्रयासों के पूरक सहयोग के उदाहरण के तौर पर रखा गया।
गतिविधि नहीं, परिणाम पर रहेगा जोर
कॉन्क्लेव में CSR परियोजनाओं को केवल खर्च या गतिविधियों की संख्या के आधार पर देखने के बजाय उनके वास्तविक और मापने योग्य परिणामों पर ध्यान देने की बात कही गई।
राज्य और जिलों की जरूरतों को CSR संस्थाओं की क्षमता एवं विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने और सफल मॉडलों को बड़े स्तर पर लागू करने पर जोर दिया गया।
सरकारी और कॉरपोरेट साझेदारी को मिलेगा ढांचा
सत्र में सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों, विकास एजेंसियों, NGOs और अन्य हितधारकों के बीच समन्वय को जरूरी बताया गया।
सफल CSR परियोजनाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप रखते हुए उनके परिणाम मापने और प्रभावी मॉडलों को सरकारी व्यवस्थाओं से जोड़कर लंबे समय तक चलाने की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया।
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