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MP Cyber Crime Report 2025: 634 करोड़ की साइबर ठगी, सिर्फ 22% राशि फ्रीज, पीड़ितों को मिले सिर्फ 7.4% पैसे वापस

21 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Cyber Crime Report 2025: 634 करोड़ की साइबर ठगी, सिर्फ 22% राशि फ्रीज, पीड़ितों को मिले सिर्फ 7.4% पैसे वापस

MP Cyber Crime Report 2025: 634 करोड़ की साइबर ठगी, सिर्फ 22% राशि फ्रीज, पीड़ितों को मिले सिर्फ 7.4% पैसे वापस

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। डिजिटल इंडिया के दौर में ठग भी पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं। मध्य प्रदेश में साल 2025 के दौरान साइबर ठगी ने जो आंकड़े सामने रखे हैं, वो किसी को भी डराने के लिए काफी हैं। 634 करोड़ रुपये की ठगी, लेकिन पीड़ितों तक वापस पहुंचे सिर्फ 47 करोड़ रुपये — यानी कुल राशि का महज 7.4 प्रतिशत। हालात ये हैं कि प्रदेश फ्रीज कराई गई राशि के मामले में टॉप-5 से भी बाहर हो चुका है।


टॉप-5 से बाहर, सिर्फ 22% राशि ही फ्रीज

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मध्य प्रदेश में साइबर ठगी की कुल राशि का सिर्फ 22 प्रतिशत ही फ्रीज कराया जा सका। यानी करीब 634 करोड़ की ठगी में से केवल 137 करोड़ रुपये ही समय रहते अपराधियों के खातों में रोके जा सके। इसके बावजूद राशि रिकवरी के मामले में प्रदेश देशभर में छठवें स्थान पर पहुंच गया है, जो पहले 22वां स्थान था।


634 करोड़ की साइबर ठगी, 4800 शिकायतें दर्ज

वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल करीब 4,800 साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में 634 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पुलिस रिकॉर्ड में आई है। साइबर पुलिस सिर्फ 137 करोड़ रुपये फ्रीज करा सकी, जबकि पीड़ितों को 47 करोड़ रुपये ही वापस मिल पाए।

 अधिकारियों के मुताबिक, कई मामलों में साइबर अपराध दूसरे राज्यों से ऑपरेट किए जाते हैं, जिससे जांच में ज्यादा समय, संसाधन और समन्वय की जरूरत पड़ती है।


क्राइम के बाद गोल्डन ऑवर सबसे अहम

साइबर ठगी के बाद पहले दो घंटे सबसे अहम होते हैं। अगर पीड़ित तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करता है, तो ठगी की राशि को अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही फ्रीज किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर सिस्टम के तहत अब आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी और डिजिटल सबूत तुरंत कानूनी रूप से सुरक्षित हो रहे हैं, जिससे रिकवरी की संभावना बढ़ रही है।


देरी बनी सबसे बड़ी वजह

राज्य साइबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई पीड़ित समय पर पुलिस और बैंक को सूचना नहीं देते। इसी देरी की वजह से जीवनभर की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में अपराधियों के खातों में चली जाती है और फिर रिकवरी मुश्किल हो जाती है। हालांकि 47 करोड़ रुपये वापस दिलाने के बाद मध्य प्रदेश रिकवरी रैंकिंग में देश में छठे स्थान पर आ गया है।

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