
भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खबर है। सरकार ने मुफ्त साइकिल योजना को अगले 5 साल तक जारी रखने का फैसला लिया है। लेकिन इस बार भी पैसे सीधे छात्रों के खाते में नहीं आएंगे।
990 करोड़ की मंजूरी, इस साल खर्च बढ़ा
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने इस योजना के लिए ₹990 करोड़ का बजट 2030-31 तक के लिए मंजूर किया है। सिर्फ इस साल ही करीब ₹210 करोड़ खर्च होंगे, जो पिछले साल के ₹195 करोड़ से करीब 7.69% ज्यादा है। यानी सरकार योजना पर खर्च बढ़ा रही है, लेकिन तरीका वही रखा गया है।
छात्रों को नकद नहीं, सरकार खरीदेगी साइकिल
इस योजना में बड़ा बदलाव यही है कि छात्रों को सीधे पैसे नहीं दिए जाएंगे। अब साइकिल की खरीदी सेंट्रल परचेजिंग के जरिए होगी, जिसे लोक शिक्षण संचालनालय संभालेगा। एक साइकिल पर करीब ₹3500 से ₹3800 खर्च होने का अनुमान है।
कैसे बदली योजना की तस्वीर
इस योजना की शुरुआत साल 2004-05 में हुई थी, जब यह सिर्फ अनुसूचित जनजाति (ST) की छात्राओं के लिए थी। धीरे-धीरे इसे सभी वर्गों—SC, OBC और सामान्य—के उन छात्रों तक बढ़ाया गया, जो गांव से बाहर पढ़ने जाते हैं। अब यह योजना लाखों विद्यार्थियों तक पहुंच चुकी है।
शिक्षा ढांचे को भी मिलेगा बूस्ट
सरकार ने सिर्फ साइकिल योजना ही नहीं, बल्कि शिक्षा ढांचे के लिए भी बड़ा बजट मंजूर किया है। करीब ₹2191 करोड़ शिक्षा सुधार के लिए दिए गए हैं, जिसमें 47 DIET संस्थान और 7 पीजीबीटी कॉलेज अपग्रेड होंगे। यहां नई लैब, कंप्यूटर, हॉस्टल और स्टाफ सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।
33,985 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी
कैबिनेट ने कुल मिलाकर ₹33,985 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इसमें सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य और भवन निर्माण जैसे बड़े सेक्टर शामिल हैं। खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मरीजों के परिजनों के लिए किफायती विश्रामगृह भी बनाए जाएंगे।
आगे क्या बदलेगा?
सरकार का दावा है कि इन फैसलों से शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों मजबूत होंगे। लेकिन छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर रहेगी कि साइकिल समय पर मिलती है या नहीं और योजना का फायदा जमीन पर कितना दिखता है।
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