
भोपाल। मध्य प्रदेश में भविष्य में होने वाले परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़कर 44 तक पहुंच सकती है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक स्टडी में राज्य के लिए 15 अतिरिक्त लोकसभा सीटों का मॉडल पेश किया गया है।
परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह कोई अंतिम परिसीमन प्रस्ताव नहीं है। इसका उद्देश्य प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के लिए संभावित मॉडल प्रस्तुत करना है।
देशभर में 824 लोकसभा सीटों का सुझाव
रिपोर्ट के अनुसार देश में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 824 किए जाने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही 170 बड़े संसदीय क्षेत्रों को दो या तीन हिस्सों में बांटने की सिफारिश की गई है। इसी मॉडल के आधार पर मध्य प्रदेश में करीब 52% सीटें बढ़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
सिर्फ आबादी नहीं, कई मानकों पर हो सकता है परिसीमन
परिषद का कहना है कि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर तय नहीं होना चाहिए। रिपोर्ट में कई अन्य मानकों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
मतदाताओं की संख्या
भौगोलिक क्षेत्रफल
शहरीकरण का स्तर
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी
भाषाई एवं सामाजिक विविधता
मतदान प्रतिशत
रिपोर्ट के मुताबिक इन मानकों से सांसद और मतदाताओं के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा तथा निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलन मजबूत होने के साथ मतदान प्रतिशत में भी सुधार संभव है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बदलाव संभव
स्टडी में मध्य प्रदेश का नया सीटवार नक्शा जारी नहीं किया गया है। फिर भी सुझाए गए मानकों के आधार पर कुछ बड़े संसदीय क्षेत्रों में बदलाव की संभावना अधिक मानी गई है।
संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्र:
भोपाल
इंदौर
जबलपुर
ग्वालियर
उज्जैन
सागर
रीवा
छिंदवाड़ा
इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या अधिक है, शहरी विस्तार तेजी से बढ़ा है और संसदीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से भी बड़े हैं। रिपोर्ट में नए जिले मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा को भी भविष्य के परिसीमन में महत्वपूर्ण माना गया है।
मालवा-निमाड़ और महाकौशल में बड़ा असर
रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक प्रभाव मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मालवा-निमाड़ में मौजूदा 9 लोकसभा सीटों में से इंदौर, उज्जैन, धार और खरगोन संसदीय क्षेत्रों के विभाजन का सुझाव दिया गया है। इससे यहां सीटों की संख्या बढ़कर 13 हो सकती है। वहीं महाकौशल में छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और बालाघाट संसदीय क्षेत्रों के विभाजन का प्रस्ताव रखा गया है। इससे इस क्षेत्र की सीटें बढ़कर 8 तक पहुंच सकती हैं।
राजनीतिक समीकरणों पर क्या पड़ सकता है असर
यदि भविष्य में मध्य प्रदेश की लोकसभा सीटें 44 होती हैं तो राष्ट्रीय राजनीति में राज्य की भागीदारी और प्रभाव बढ़ सकता है। संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी की संभावना भी मजबूत हो सकती है। साथ ही राजनीतिक दलों को संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति में बदलाव करने पड़ सकते हैं, क्योंकि कई संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदलने की संभावना रहेगी।
भाजपा के लिए संभावित मजबूत क्षेत्र
पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों के रुझानों के आधार पर भाजपा के लिए ये संभावित नई सीटें अपेक्षाकृत मजबूत मानी गई हैं।
भोपाल (दूसरी सीट)
इंदौर (दूसरी सीट)
नागदा
बीना
ग्वालियर शहर
सीहोर
मऊगंज
लांजी
रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में भाजपा लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रही है।
कांग्रेस को किन क्षेत्रों में मिल सकते हैं अवसर
यदि परिसीमन सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया जाता है तो कांग्रेस के लिए कुछ क्षेत्रों में बेहतर संभावनाएं बन सकती हैं।
पांढुर्णा
सरदारपुर
बड़वानी (ST)
डिंडौरी (ST)
उमरिया (ST)
इन इलाकों में आदिवासी और ग्रामीण मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक बताई गई है।
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