
भोपाल। मध्य प्रदेश में नए पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति से पहले कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति तारीख को लेकर प्रशासनिक मतभेद सामने आए हैं। पुलिस मुख्यालय ने तारीख 30 नवंबर से बढ़ाकर 2 दिसंबर 2026 करने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।
जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। तारीख में बदलाव से DGP पद के संभावित उम्मीदवारों की पात्रता और चयन की गणना प्रभावित हो सकती है।
क्यों उलझा DGP की रिटायरमेंट तारीख का मामला?
पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा ने गृह विभाग को भेजी नोटशीट में कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति के लिए 2 दिसंबर 2026 की तारीख प्रस्तावित की। इसका आधार यह बताया गया कि उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को DGP का पदभार संभाला था।
गृह विभाग ने इस गणना पर तकनीकी सवाल उठाए हैं। विभाग का पक्ष है कि नियुक्ति संबंधी नियमों के मुताबिक नए DGP का दो साल का कार्यकाल 1 दिसंबर से प्रभावी होता है, इसलिए पदभार ग्रहण करने की वास्तविक तारीख के आधार पर सेवानिवृत्ति की तारीख बदलना उचित नहीं होगा।
वरुण कपूर ने मुख्य सचिव और ACS से की मुलाकात
DGP चयन पैनल में शामिल वरिष्ठ IPS अधिकारी और जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने इस मुद्दे पर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल तथा गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला से मुलाकात की।
कपूर ने DGP नियुक्ति से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए पुलिस मुख्यालय की नोटशीट पर मौखिक आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि सेवानिवृत्ति की तारीख को 2 दिसंबर करने का प्रस्ताव नियमों के अनुरूप नहीं है।
छह महीने की शर्त से कैसे बदल सकती है चयन की तस्वीर?
DGP पद के लिए निर्धारित पात्रता में अधिकारी की सेवानिवृत्ति तक कम से कम छह महीने का समय शेष होना जरूरी बताया गया है। इसी शर्त के कारण कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति तारीख का विवाद चयन प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।
प्रस्तावित तारीख में बदलाव होने पर डॉ. वरुण कपूर की पात्रता प्रभावित हो सकती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, तारीख 30 नवंबर रहने पर वे छह महीने की अवधि संबंधी शर्त के दायरे में आते हैं, जबकि 2 दिसंबर की तारीख से उनकी दावेदारी पर असर पड़ने की बात कही गई है।
पंकज श्रीवास्तव का नाम भी आ सकता है चर्चा में
DGP चयन पैनल में चौथे स्थान पर बताए गए स्पेशल DGP पंकज श्रीवास्तव की दावेदारी भी इस घटनाक्रम से प्रभावित हो सकती है। सेवानिवृत्ति की तारीख और पात्रता की गणना के आधार पर वे चयन की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
अंतिम स्थिति संबंधित नियमों की व्याख्या और सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के तर्क अलग-अलग
इस विवाद में दोनों पक्षों की गणना का आधार अलग है।
पुलिस मुख्यालय का तर्क: कैलाश मकवाना ने 2 दिसंबर 2024 को पदभार ग्रहण किया था, इसलिए सेवानिवृत्ति की तारीख भी 2 दिसंबर 2026 होनी चाहिए।
गृह विभाग का तर्क: नए DGP का दो साल का कार्यकाल 1 दिसंबर से प्रभावी माना जाता है। पदभार कुछ दिन बाद संभालने से आदेश की प्रभावी तारीख नहीं बदलती।
नोटशीट पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से अंतिम निर्णय लिया जाना है।
अक्टूबर 2025 में भी बढ़ाया गया था मकवाना का कार्यकाल
कैलाश मकवाना के कार्यकाल में इससे पहले भी बदलाव किया गया था। 31 अक्टूबर 2025 को उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख एक साल आगे बढ़ाई गई थी।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित दिशानिर्देशों के आधार पर लिया गया था। कार्यकाल विस्तार का आदेश मध्य प्रदेश गृह विभाग के अपर सचिव आशीष भार्गव ने जारी किया था।
अब मौजूदा विवाद में सरकार का निर्णय यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि कैलाश मकवाना की सेवानिवृत्ति की तारीख कौन-सी मानी जाएगी और DGP पद के संभावित उम्मीदवारों की पात्रता पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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