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MP E-Challan Policy: 60 दिन में जुर्माना नहीं भरा तो वाहन मालिकों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

25 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP E-Challan Policy: 60 दिन में जुर्माना नहीं भरा तो वाहन मालिकों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मध्य प्रदेश में ट्रैफिक नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों पर जल्द सख्ती बढ़ सकती है। परिवहन विभाग ऐसी नई नीति तैयार कर रहा है, जिसमें ई-चालान जारी होने के 60 दिन के भीतर जुर्माना जमा करना अनिवार्य होगा।


समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं होने पर वाहन मालिक और चालक के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का मकसद केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लगातार नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।


ई-चालान की संख्या लगातार बढ़ी

प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान ई-चालान के मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • 2023: करीब 90 हजार ई-चालान

  • 2024: करीब 13 लाख ई-चालान

  • 2025: 18 लाख से अधिक ई-चालान


इन आंकड़ों के बावजूद बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।


60 दिन बाद क्या हो सकती है कार्रवाई?

परिवहन विभाग प्रस्तावित नीति में यह तय कर रहा है कि निर्धारित 60 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद लंबित ई-चालान वाले वाहनों पर कौन-कौन से कदम उठाए जाएं।


विचार किए जा रहे विकल्पों में शामिल हैं—

  • वाहन मालिक को नोटिस जारी करना

  • वाहन के दस्तावेजों से जुड़ी कार्रवाई

  • परमिट या फिटनेस पर रोक

  • गंभीर मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने का प्रावधान


विभाग का उद्देश्य क्या है?

परिवहन विभाग के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था का फोकस केवल जुर्माना वसूलना नहीं है। उद्देश्य उन वाहन मालिकों और चालकों की पहचान करना है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।


विशेषज्ञों ने क्या सुझाव दिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं है। व्यवस्था तभी असरदार होगी जब उसके बाद भुगतान और कार्रवाई की निगरानी भी सुनिश्चित हो।


विशेषज्ञों ने सुझाव दिए हैं कि—

  • 60 दिन की भुगतान समय सीमा का सख्ती से पालन हो।

  • लंबित ई-चालानों की स्वतः पहचान करने वाली व्यवस्था बने।

  • बार-बार नियम तोड़ने वालों की अलग रिस्क कैटेगरी तैयार की जाए।

  • वाहन, चालक और चालान से जुड़े डेटा को एकीकृत किया जाए, ताकि स्थायी सुधार संभव हो सके।

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