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MP Economic Corridors: 2028 तक बनेगा 3,300 किमी का मेगा रोड नेटवर्क, सफर और कारोबार दोनों होंगे आसान

16 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Economic Corridors: 2028 तक बनेगा 3,300 किमी का मेगा रोड नेटवर्क, सफर और कारोबार दोनों होंगे आसान
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार करीब 3,300 किलोमीटर लंबे 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना पर 36,483 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और लक्ष्य साल 2028 तक निर्माण पूरा करने का है। यह सिर्फ सड़क निर्माण की योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रदेश के 55 जिलों के बीच दूरी कम करना, व्यापार बढ़ाना और औद्योगिक विकास को नई गति देना है। आइए जानते हैं कि इन छह कॉरिडोर से किन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।


मालवा-निमाड़ विकासपथ से व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 450 किलोमीटर होगी और इसके निर्माण पर 7,972 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें गरोठ-उज्जैन (136 किमी) और इंदौर-बुरहानपुर (215 किमी) मार्ग शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने पर मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक शहरों के बीच आवागमन तेज होगा। सरकार का लक्ष्य इसे 2027 तक पूरा करना है। आगे जानिए विंध्य क्षेत्र को क्या फायदा मिलेगा।


विंध्य एक्सप्रेस-वे से भोपाल, रीवा और सिंगरौली होंगे करीब

676 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेस-वे पर 3,809 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह मार्ग भोपाल से शुरू होकर 10 जिलों से गुजरेगा, जिनमें सागर, दमोह, कटनी और रीवा प्रमुख हैं। परियोजना पूरी होने के बाद भोपाल से रीवा और सिंगरौली तक की यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होने की उम्मीद है। अब नजर डालते हैं बुंदेलखंड क्षेत्र की बड़ी योजना पर।


बुंदेलखंड विकासपथ से रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

330 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के निर्माण पर 3,357 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह मार्ग भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर को जोड़ेगा। सरकार का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क से स्थानीय व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। अगला कॉरिडोर चंबल क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है।


अटल प्रगतिपथ से चंबल क्षेत्र में खुलेंगे उद्योगों के नए रास्ते

299 किलोमीटर लंबा अटल प्रगतिपथ दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को बुंदेलखंड कॉरिडोर से जोड़ेगा। इस परियोजना से श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे जिलों को सीधी कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। बेहतर परिवहन व्यवस्था के साथ यहां औद्योगिक निवेश की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। सबसे बड़े कॉरिडोर की जानकारी आगे पढ़िए।


नर्मदा प्रगतिपथ बनेगा परियोजना का सबसे लंबा कॉरिडोर

पूरी योजना में 867 किलोमीटर लंबा नर्मदा प्रगतिपथ सबसे बड़ा कॉरिडोर होगा। यह झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी सहित कई जिलों को जोड़ेगा। इसकी खास बात यह है कि यह मार्ग छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्य प्रदेश के रास्ते गुजरात सीमा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। अब जानते हैं पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजना के बारे में।


मध्यभारत विकासपथ से पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

746 किलोमीटर लंबा मध्यभारत विकासपथ राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। इस कॉरिडोर के जरिए भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। साथ ही मुरैना से बैतुल तक निर्बाध कनेक्टिविटी विकसित करने की भी योजना है।


प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा

सरकारी योजना के अनुसार, 6 इकोनॉमिक कॉरिडोर, 3,300 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क और 36,483 करोड़ रुपये का निवेश मध्य प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को गति मिलने की उम्मीद है। यदि परियोजना तय समयसीमा के अनुसार पूरी होती है, तो 2028 तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आवागमन पहले से कहीं अधिक तेज और सुगम हो सकता है।

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