
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक भले धीमी हो, लेकिन बिजली सुरक्षा को लेकर हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं। सड़कों पर जलभराव, गड्ढों और बिजली के खंभों से लटकते तार लोगों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। राजधानी भोपाल से लेकर अन्य शहरों तक बाजार, कॉलोनियों और मुख्य सड़कों पर खुले और झूलते तार आसानी से देखे जा सकते हैं। बिजली सुरक्षा को लेकर जारी चेतावनियों का जमीनी असर नजर नहीं आ रहा है।
MPERC रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (MPERC) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 1,963 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1,102 लोगों की मौत हुई, 329 लोग घायल हुए और 1,492 पशुओं की भी जान गई। इन आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में औसतन हर दिन 3 लोगों की मौत करंट लगने से हो रही है। यानी लगभग हर 8 घंटे में एक व्यक्ति बिजली हादसे का शिकार बन रहा है।
सुरक्षा नियमों के पालन में कमी
आयोग ने बिजली सुरक्षा नियमों की समीक्षा के दौरान पाया कि करंट लगने और अन्य विद्युत हादसों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन की जरूरत पर जोर दिया गया है।
निर्देश नहीं माने तो होगी कार्रवाई
MPERC ने स्पष्ट किया है कि यदि बिजली सुरक्षा से जुड़े निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित बिजली कंपनियों के खिलाफ बिजली अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
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