
भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में बिल बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसकी वजह नया इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2025 और स्मार्ट मीटर सिस्टम है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अगर कोई उपभोक्ता तय लोड से ज्यादा बिजली बार-बार इस्तेमाल करता है तो उसका कनेक्शन लोड अपने आप बढ़ जाएगा। इसका मतलब है कि उपभोक्ता को हर महीने ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देना पड़ सकता है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के लिए किसी कर्मचारी की जांच या उपभोक्ता के आवेदन की जरूरत नहीं होगी। स्मार्ट मीटर खुद ही अधिकतम बिजली खपत के आधार पर लोड अपडेट कर देगा।
कैसे काम करेगा नया स्मार्ट मीटर नियम
नए नियम के मुताबिक अगर किसी उपभोक्ता ने अपने स्वीकृत लोड से ज्यादा बिजली तीन बार इस्तेमाल की, तो सिस्टम उसी अधिकतम खपत के आधार पर नया लोड तय कर देगा। यानी यदि किसी घर का कनेक्शन 1 किलोवॉट का है और वह बार-बार इससे ज्यादा बिजली उपयोग करता है, तो उसका लोड स्वतः बढ़ाकर 2 किलोवॉट या उससे अधिक कर दिया जाएगा। लोड बढ़ते ही बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा, जो हर महीने देना अनिवार्य होता है।
घरेलू उपभोक्ताओं पर कैसे पड़ेगा असर
मौजूदा टैरिफ के अनुसार 150 यूनिट तक बिजली खर्च करने पर लगभग 129 रुपये फिक्स्ड चार्ज लगता है। इसके बाद हर 0.1 किलोवॉट (लगभग 15 यूनिट) अतिरिक्त भार पर करीब 28 रुपये और जुड़ जाते हैं।
उदाहरण से समझिए
स्थिति 1:
कनेक्शन: 1 किलोवॉट
बिजली खपत: 51–150 यूनिट
फिक्स्ड चार्ज: लगभग 129 रुपये प्रति माह
स्थिति 2:
अगर खपत 151–300 यूनिट हो गई
तो अतिरिक्त भार के हिसाब से करीब 280 रुपये अतिरिक्त फिक्स्ड चार्ज लग सकता है
इस स्थिति में कुल फिक्स्ड चार्ज लगभग 409 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकता है।
गर्मियों में बढ़ सकती है परेशानी
गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के कारण बिजली खपत अचानक बढ़ जाती है। अगर किसी घर का कनेक्शन 1 किलोवॉट है लेकिन गर्मियों में खपत 2 किलोवॉट तक पहुंच जाती है और ऐसा साल में तीन बार हो जाता है, तो सिस्टम इसे नया लोड मानकर कनेक्शन को स्वतः 2 किलोवॉट में बदल सकता है। इसके बाद उपभोक्ता को उसी नए लोड के हिसाब से हर महीने ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देना पड़ेगा।
ज्यादा लोड इस्तेमाल करने पर कितना बढ़ेगा बिल
मान लीजिए किसी उपभोक्ता का स्वीकृत लोड 2 किलोवॉट है। अगर वह साल में तीन बार 5 किलोवॉट तक बिजली इस्तेमाल कर लेता है, तो साल के अंत तक उसका कनेक्शन लोड 5 किलोवॉट हो सकता है। इससे फिक्स्ड चार्ज में बड़ा अंतर आ सकता है। जहां पहले कम लोड पर कम चार्ज देना पड़ता था, वहीं बढ़े हुए लोड पर कई गुना ज्यादा राशि हर महीने देनी होगी।
क्या होता है फिक्स्ड चार्ज
फिक्स्ड चार्ज वह रकम है जो बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से हर महीने वसूलती हैं। यह कनेक्शन के स्वीकृत लोड पर आधारित होता है, न कि बिजली उपयोग पर। उदाहरण के तौर पर अगर किसी घर का लोड 2 किलोवॉट है और फिक्स्ड चार्ज 100 रुपये प्रति किलोवॉट है, तो भले ही उपभोक्ता एक यूनिट बिजली खर्च करे या बिल्कुल न करे, उसे 200 रुपये हर महीने देने होंगे। इसलिए लोड बढ़ते ही फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाता है।
संस्थानों और अस्थायी कनेक्शन पर भी असर
- नए प्रस्ताव का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा।
- अस्थायी कनेक्शन (जैसे मैरिज गार्डन) पर लगभग 82 रुपये प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज लगता है।
- संस्थानों में 10 किलोवॉट तक लोड पर करीब 162 रुपये प्रति किलोवॉट फिक्स्ड चार्ज लागू है।
- प्रस्ताव के अनुसार इस दर में लगभग 15% तक बढ़ोतरी की संभावना भी जताई जा रही है।
नियामक आयोग क्या कहता है
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के सचिव उमाकांत पांडा के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर बनाए गए नियम तय प्रक्रिया के तहत लागू होते हैं। इस प्रक्रिया में पहले सुझाव और आपत्तियां ली जाती हैं। इसके बाद नियामक आयोग उसी आधार पर राज्य में आवश्यक प्रावधान तय करता है।
क्यों बढ़ी उपभोक्ताओं की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर तकनीक बिजली खपत की निगरानी को आसान बनाएगी, लेकिन इससे उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड तेजी से बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो बिजली की यूनिट कीमत भले समान रहे, लेकिन बढ़ते फिक्स्ड चार्ज के कारण हर महीने का कुल बिजली बिल ज्यादा आ सकता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

