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मध्यप्रदेश बिजली बिल में अक्टूबर से बढ़ोतरी संभव, 3% तक बढ़ सकता है खर्च; पावर परचेज चार्ज भी जुड़ेगा

07 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश बिजली बिल में अक्टूबर से बढ़ोतरी संभव, 3% तक बढ़ सकता है खर्च; पावर परचेज चार्ज भी जुड़ेगा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर से बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर बिल में 2 से 3% तक अतिरिक्त भार आने की आशंका है।


बिजली चोरी से होने वाले नुकसान का एक हिस्सा भी उपभोक्ताओं के खाते में जोड़ने की तैयारी है। इसके साथ पावर परचेज चार्ज भी बिल की गणना में शामिल किया जा सकता है।


सितंबर में पूरी होगी समीक्षा

राज्य में बिजली आपूर्ति और टैरिफ से जुड़े नियमों में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। विद्युत विनियामक आयोग बिजली आपूर्ति, टैरिफ निर्धारण और व्हीलिंग चार्ज से संबंधित विनियमों में दूसरा संशोधन कर रहा है। मौजूदा प्रस्ताव पर सुझाव, आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के मुताबिक इसकी समीक्षा सितंबर 2026 तक पूरी करने की तैयारी है। इसके बाद अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू हो सकती है।


उपभोक्ताओं पर क्यों बढ़ेगा भार?

प्रस्तावित व्यवस्था में बिजली वितरण कंपनियों के प्रदर्शन को भी बिल से जोड़ा जा रहा है। सकल तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियां कम करने में कंपनी के प्रदर्शन से होने वाले फायदे या नुकसान को उपभोक्ताओं के साथ साझा करने का प्रावधान बनाया जा रहा है। इसका सीधा असर बिजली बिल पर पड़ सकता है। बिजली खरीद से जुड़े खर्च और बिजली चोरी से होने वाले नुकसान का भार भी उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना है।


अप्रैल में भी बढ़ चुके हैं बिजली के दाम

मध्यप्रदेश में बिजली बिल पर पहले ही बढ़ोतरी लागू हो चुकी है। इन बदलावों को इस तरह समझा जा सकता है—

अप्रैल 2026: बिजली बिल में 4% बढ़ोतरी की गई।

हर महीने: फ्यूल चार्ज के नाम पर 3 से 5% तक बढ़ोतरी होती है।

अक्टूबर से: फ्यूल चार्ज के साथ पावर परचेज चार्ज भी जोड़े जाने की तैयारी है।

बिजली चोरी: 10% तक बिजली चोरी का भार उपभोक्ताओं के खाते में जोड़ने की व्यवस्था प्रस्तावित है।


कंपनियों के प्रदर्शन का असर बिल पर पड़ेगा

नई व्यवस्था का उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों को कम करना है। प्रस्ताव में कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े फायदे और नुकसान को उपभोक्ताओं के साथ साझा करने का मॉडल रखा गया है। इसका मतलब यह है कि वितरण कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़ी लागत या बचत का असर आगे चलकर बिजली उपभोक्ताओं के बिल में दिखाई दे सकता है।


सुनवाई के बाद तय होगा अंतिम प्लान

एमपीआरईसी के सचिव उमाकांत पांडा के मुताबिक बिजली बिल के नियमों में बदलाव की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इस विषय पर सुनवाई जारी है। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान मिलने वाले सुझावों की समीक्षा की जाएगी। उपयोगी सुझावों को प्रस्ताव में शामिल करने के बाद नया प्लान लागू किया जाएगा।


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