
भोपाल। मध्य प्रदेश में बिजली क्षेत्र से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ राज्य की बिजली कंपनियों में 50 हजार पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग को जुलाई के अंत तक नया चेयरमैन मिलने की तैयारी है। सरकार के इस फैसले का सीधा असर प्रदेश के करीब पौने दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इससे बिजली सेवाओं की गुणवत्ता और शिकायतों के निपटारे में सुधार आएगा।
जुलाई तक मिल सकता है नया चेयरमैन
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में नए चेयरमैन की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इसके अलावा मुख्य सचिव मध्य प्रदेश और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष को सदस्य बनाया गया है। इच्छुक उम्मीदवार 19 जून तक आवेदन कर सकते हैं। समिति योग्य नामों की जांच के बाद दो नाम सरकार को भेजेगी और जुलाई के अंत तक नियुक्ति होने की संभावना जताई जा रही है।
बिजली कंपनियों में 50 हजार पद होंगे भरे
मोहन सरकार पहले ही बिजली क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों में करीब 50 हजार नए पदों को मंजूरी दे चुकी है। इनमें प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों के अलावा पावर मैनेजमेंट कंपनी, पावर जनरेटिंग कंपनी और अन्य संबद्ध संस्थाएं शामिल हैं। लंबे समय से खाली पदों को भरने की मांग की जा रही थी।
35 हजार सीधी भर्ती, 15 हजार पदोन्नति से भरेंगे
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के अनुसार स्वीकृत पदों में से 35 हजार पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। वहीं शेष 15 हजार पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे विभागों में कार्यकुशलता बढ़ेगी और कर्मचारियों को करियर ग्रोथ का अवसर भी मिलेगा।
पिछले एक साल में 2 हजार से ज्यादा नियुक्तियां
बिजली कंपनियों ने बीते एक वर्ष में 2 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान शुरू होने से तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मानव संसाधन की कमी दूर करने में मदद मिलेगी।
लगातार रिटायरमेंट से खाली हो रहे हैं पद
बिजली विभाग में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी पिछले कई वर्षों से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कई पद ऐसे हैं जो 40 से 50 वर्ष पहले भरे गए थे और अब लगातार रिटायरमेंट के कारण रिक्त हो रहे हैं। सरकार इन पदों को भी चरणबद्ध तरीके से भरने की योजना पर काम कर रही है ताकि भविष्य में सेवाओं पर असर न पड़े।
सभी पद एक साथ क्यों नहीं भरे जा रहे?
सरकार का मानना है कि यदि सभी पद एक ही समय में भर दिए गए तो भविष्य में एक साथ बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्ति की स्थिति बन सकती है। ऐसे में 30 से 50 साल बाद फिर एक ही अवधि में हजारों पद खाली हो सकते हैं, जिससे उपभोक्ता सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ने का खतरा रहेगा। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया को संतुलित और चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
युवाओं को भी मिलेगा फायदा
सरकार का तर्क है कि यदि सभी पद एक ही वर्ष में भर दिए जाएं तो कई ऐसे युवा अवसर से वंचित रह जाएंगे जिनकी योग्यता या आयु भविष्य में भर्ती के लिए पात्र होगी। चरणबद्ध भर्ती व्यवस्था से आने वाले वर्षों में भी रोजगार के अवसर बने रहेंगे और अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का मौका मिलेगा।
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