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MP Engineering Admission में बड़ा बदलाव, दो बार एडमिशन सिस्टम लागू—प्लेसमेंट पर क्या असर पड़ेगा?

02 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Engineering Admission में बड़ा बदलाव, दो बार एडमिशन सिस्टम लागू—प्लेसमेंट पर क्या असर पड़ेगा?
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। Engineering Admission MP में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब इंजीनियरिंग कॉलेजों में साल में दो बार एडमिशन होंगे—एक जुलाई में और दूसरा जनवरी में, जिससे एडमिशन सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा।


क्यों लिया गया फैसला?

तकनीकी शिक्षा विभाग ने यह निर्णय सीटें खाली रहने की समस्या खत्म करने के लिए लिया है। अब जुलाई सत्र में 100% सीटों के लिए सेंट्रलाइज्ड काउंसलिंग होगी और जो सीटें बचेंगी, उन्हें जनवरी सत्र में भरा जाएगा। इससे अक्टूबर-नवंबर तक चलने वाली लंबी प्रक्रिया पर रोक लगने की उम्मीद है।


RGPV तैयार कर रहा नई गाइडलाइन

Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya (RGPV) इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन बना रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे एकेडमिक कैलेंडर समय पर लागू हो सकेगा और एडमिशन से जुड़ी देरी और विवाद कम होंगे।


कैसे चलेगी पढ़ाई? उल्टा होगा सेमेस्टर क्रम

नई व्यवस्था में जनवरी सत्र के छात्रों के लिए अलग मॉडल तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव है कि ये छात्र पहले दूसरे सेमेस्टर से पढ़ाई शुरू करेंगे, फिर जुलाई बैच के साथ पहला सेमेस्टर पढ़ेंगे। इसके बाद क्रमशः 3rd-4th, 5th-6ठ और 7th-8th सेमेस्टर पढ़ाए जाएंगे—यहीं से असली चुनौती शुरू होती है।


एक्सपर्ट की चेतावनी: समझ पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग में शुरुआती सेमेस्टर में बेसिक विषय होते हैं और बाद में एडवांस पढ़ाया जाता है। अगर छात्र पहले एडवांस विषय पढ़ेंगे, तो उनकी समझ प्रभावित हो सकती है। कई विषय आपस में जुड़े होते हैं, इसलिए यह मॉडल छात्रों के लिए कठिन साबित हो सकता है।


प्लेसमेंट पर भी बड़ा असर

जनवरी सत्र में एडमिशन लेने वाले छात्र जनवरी-फरवरी में पासआउट होंगे, जबकि अधिकतर कंपनियां दिसंबर तक रिजल्ट आने वाले छात्रों को ही भर्ती करती हैं। ऐसे में इन छात्रों के लिए अलग से प्लेसमेंट ड्राइव करनी पड़ सकती है, जो कॉलेजों के लिए नई चुनौती बन सकती है।


लेटरल एंट्री स्टूडेंट्स के लिए मुश्किल

डिप्लोमा के बाद बीटेक सेकंड ईयर में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर भी इसका असर पड़ेगा। अभी खाली सीटों पर अगले साल लेटरल एंट्री मिल जाती है, लेकिन दो सत्र होने से सीटें कम हो सकती हैं—जिससे इन छात्रों के मौके घट सकते हैं।


क्या बदलेगा आगे?

इस नई व्यवस्था से एडमिशन प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित होने की उम्मीद है, लेकिन पढ़ाई और प्लेसमेंट के नए सवाल भी खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि यह बदलाव छात्रों के लिए अवसर बनता है या नई चुनौतियों का कारण—क्योंकि असली असर आने वाले सत्रों में ही साफ होगा।

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