
भोपाल। आप जो दूध सुबह पीते हैं, जो मावे की मिठाई त्योहार पर खाते हैं, जो घी खाने में डालते हैं — उसमें क्या है, यह जानकर आप थाली से हाथ खींच लेंगे। मध्यप्रदेश के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की ताजा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि प्रदेश में 2,000 से अधिक फूड सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। यह कोई अफवाह नहीं, सरकारी आंकड़ा है।
तीन साल, एक लाख सैंपल — और चौंकाने वाला सच
FDA ने अपनी मोबाइल वैन के जरिए पिछले तीन वर्षों में प्रदेशभर से एक लाख सैंपल जुटाए। यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर डेटा को एक जगह कंपाइल किया गया। नतीजा — 2,000 से ज्यादा सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। सबसे डरावनी बात यह है कि फेल होने वाले सैंपल किसी अनजान प्रोडक्ट के नहीं, बल्कि रोज़ की थाली में शामिल दूध, मावा, पनीर और घी जैसे डेयरी उत्पादों के हैं।
ग्वालियर सबसे आगे — 30 जिलों में फैला मिलावट का जाल
जिलेवार आंकड़े और भी चिंताजनक हैं। ग्वालियर में अकेले 420 सैंपल फेल पाए गए — यानी पूरे प्रदेश में सबसे ज़्यादा। इसके पीछे गुना (110), उज्जैन (95), भिंड (90) और बुरहानपुर (75) का नंबर है। लेकिन यह समस्या किसी एक कोने तक सीमित नहीं। शाजापुर, इंदौर, धार, रीवा, सागर, सीहोर समेत 30 से अधिक जिलों में मिलावट का जाल बिछा हुआ है। मिठाइयों के मामले में दमोह, भिंड और मुरैना के नाम सबसे ऊपर हैं।
असली जिंदगी, असली नुकसान — दो केस जो आंखें खोल देंगे
23 वर्षीय राहुल शर्मा ने दोस्तों के साथ बाहर खाना खाया। अगले दिन तेज पेट दर्द और उल्टी-दस्त के बाद सीधे अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग की पुष्टि की — चार दिन अस्पताल में भर्ती रहे। इससे भी गंभीर मामला 29 वर्षीय सात्विक पंडित का है। जांच में विटामिन की भारी कमी, हाई कोलेस्ट्रॉल, हीमोग्लोबिन 20 से अधिक और डायबिटीज के शुरुआती संकेत मिले। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. किसलय श्रीवास्तव ने उन्हें 'रिस्क ऑफ हार्ट डिजीज' कैटेगरी में रखा और खून पतला करने वाली दवाएं शुरू कीं।
मिलावट सिर्फ पेट नहीं, पूरे शरीर को तोड़ रही है
गांधी मेडिकल कॉलेज के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. मनुज शर्मा बताते हैं कि मिलावटी खाने में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक और हेवी मेटल जैसे एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स शरीर के हार्मोन सिस्टम को अंदर से खोखला कर देते हैं। नतीजा — गट हेल्थ बिगड़ती है, अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होते हैं और धीरे-धीरे मोटापा, डायबिटीज और पीसीओडी जैसी बीमारियां पैर पसारने लगती हैं। यानी एक वक्त का मिलावटी खाना सिर्फ पेट नहीं बिगाड़ता — सालों की सेहत बर्बाद कर देता है।
मसाले और मिठाइयां भी नहीं बची
सिर्फ डेयरी नहीं — लाल मिर्च, धनिया पाउडर, हल्दी और सोयाबीन तेल के भी ढेरों सैंपल फेल हुए हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इनका लगातार सेवन लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचाता है और लंबे समय में कैंसर का खतरा तक बढ़ा सकता है। जलेबी, लड्डू, बर्फी, गजक और नमकीन — त्योहारों पर जो थाली सजती है, उसमें भी बड़े पैमाने पर मिलावट पकड़ी गई है। त्योहारी सीजन में यह खतरा और भी दोगुना हो जाता है।
सवाल वही है — कार्रवाई कब?
रिपोर्ट सामने है, आंकड़े बोल रहे हैं, मरीज अस्पतालों में हैं — लेकिन मिलावटखोरों पर शिकंजा कब कसेगा? एक लाख सैंपल जांचने की क्षमता रखने वाले FDA के सामने असली परीक्षा अब है — सिर्फ रिपोर्ट बनाने की नहीं, दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

