
भोपाल। ‘बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को रोकने और पीड़ितों को तत्काल न्याय दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर सभी अंगों का समन्वय आवश्यक है। कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित बच्चों को मनोसामाजिक सहयोग और समग्र पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।’ ये बातें विशेषज्ञों की ओर से विज्ञान भवन में राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला में कही गईं।
मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से शुक्रवार को 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012' (पॉक्सो एक्ट) व 'किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015' के प्रभावी क्रियान्वयन पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें रेडक्रॉस सोसाइटी के महासचिव रमेन्द्र सिंह, मध्यप्रदेश विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक अनिल कोठारी और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा सहित 55 जिलों की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शामिल हुए ।
विशेषज्ञों की ओर से प्रशिक्षण सत्रों में पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के व्यावहारिक व विधिक पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिनिधियों को बाल संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रावधानों, जांच और प्रक्रियात्मक कार्यवाही व बालकों के सर्वोत्तम हित के सिद्धांतों के बारे में प्रशिक्षित किया गया। साथ ही संकटग्रस्त और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, पुनर्स्थापन, बेहतर केस प्रबंधन, सीसीआई समन्वय, उचित रिकॉर्ड संधारण और आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली को सुगम बनाने की दिशा में गहन प्रशिक्षण दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं बाल अधिकारों के प्रति काम करने वाले अमले की क्षमता और संवेदनशीलता को बढ़ाकर कानूनों के धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती हैं। कार्यशाला में न्यायपालिका के अधिकारी, विभिन्न शासकीय विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और गैर-सरकारी संगठन शामिल थे।।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

