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त्योहारों से पहले MP में घी के 25 ब्रांड जांच में असुरक्षित, पाम ऑयल की मिलावट; नागपुर से आया 166 किलो मिल्क केक भी अमानक

26 अग, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
त्योहारों से पहले MP में घी के 25 ब्रांड जांच में असुरक्षित, पाम ऑयल की मिलावट; नागपुर से आया 166 किलो मिल्क केक भी अमानक
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। रक्षाबंधन और आने वाले त्योहारों से पहले मध्यप्रदेश के बाजार में बिक रहे दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच ने चिंता बढ़ा दी है। खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेष अभियान में घी के 25 ब्रांड असुरक्षित पाए गए हैं। विभाग के मुताबिक इन नमूनों में पाम ऑयल समेत अन्य मिलावट की पुष्टि हुई है।


यह कार्रवाई सिर्फ घी तक सीमित नहीं है। 20 जुलाई से 25 अगस्त तक चले अभियान में प्रदेशभर से 4,642 खाद्य नमूने लिए गए। इनमें से अब तक 680 नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आई है और 174 नमूने अमानक पाए गए हैं। इस दौरान करीब 11.73 लाख किलो खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 5.61 करोड़ रुपये बताई गई है।


भोपाल में सबसे ज्यादा घी के नमूने असुरक्षित

घी की जांच में आठ जिलों से सामने आए मामलों में भोपाल सबसे आगे रहा। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल में 9, इंदौर में 7 और उज्जैन में 3 घी के नमूने फेल हुए हैं। इसके अलावा कटनी, नर्मदापुरम, डिंडौरी, धार और दमोह से भी असुरक्षित या अमानक घी के नमूने सामने आए हैं।


विभागीय जानकारी के मुताबिक जांच में जिन घी ब्रांडों को असुरक्षित पाया गया, उनमें रत्नागिरी, अनिक, जेबीएस ओरगी, गौसंत, हम्बल, नंद किशोर, नंद कृष्णा, एसआरएमआई मिल्क देसी घी, वास्तु एगमार्क देसी की अलग-अलग श्रेणियां, द्वारकेश, शगुन, दानेदार, भूमि, गोपी श्री, भूमि प्रीमियम प्योर, भूमि काऊ प्योर, अमृत, श्री सुधा प्रीमियम और श्रीमूल समेत अन्य नाम शामिल हैं।


यहां यह समझना जरूरी है कि खाद्य सुरक्षा विभाग की भाषा में ‘असुरक्षित’ और ‘अमानक’ अलग-अलग श्रेणियां हैं। इसलिए किसी उत्पाद को सीधे ‘नकली घी’ कहना जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष से आगे बढ़ जाना होगा।


166 किलो मिल्क केक भी जांच में नहीं उतरा खरा

भोपाल में खाद्य सुरक्षा टीम को दूसरे राज्यों से आने वाले दुग्ध उत्पादों पर भी नजर रखनी पड़ रही है। 24 अगस्त को नादरा बस स्टैंड पर नागपुर से आने वाली बस में संदिग्ध मावा और मिल्क केक की खेप पकड़ी गई थी।


उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस खेप में 150 किलो मावा और 166 किलो मिल्क केक था। बाद में मिल्क केक का नमूना जांच में अमानक पाया गया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मामले में नागपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। आधिकारिक जानकारी में यह भी कहा गया है कि खाद्य सामग्री बिना बिल/बिल्टी के परिवहन की जा रही थी।


कुछ रिपोर्टों में इस मिल्क केक को नागपुर के जरीपटका स्थित मनन स्वीट्स से जोड़ा गया है। हालांकि विभाग की जारी जानकारी में फर्म का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए इस हिस्से को आरोप की तरह नहीं बल्कि उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।


4,642 नमूनों की जांच, 174 अमानक

इस पूरे अभियान का दायरा काफी बड़ा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 4,642 नमूनों में 2,605 लीगल और 2,037 सर्विलेंस नमूने शामिल थे। राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला ने अब तक 680 नमूनों की रिपोर्ट जारी की है। इनमें 174 नमूने अमानक मिले हैं।


कार्रवाई के दौरान 18 लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए हैं, जबकि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के तहत 172 नोटिस जारी किए गए। अमानक और असुरक्षित खाद्य पदार्थों से जुड़े मामलों में संबंधित विक्रेताओं और निर्माताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।


एनालॉग पनीर पर भी कार्रवाई

त्योहारों के सीजन में सिर्फ घी और मिठाई ही विभाग के रडार पर नहीं हैं। प्रतिबंधित एनालॉग पनीर के खिलाफ भी प्रदेशभर में कार्रवाई की गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार करीब 10,835 किलो एनालॉग पनीर जब्त किया गया है।


आखिर घी में पाम ऑयल मिलाने का मामला इतना गंभीर क्यों?

घी की पहचान और गुणवत्ता के लिए खाद्य सुरक्षा मानक तय हैं। FSSAI के निर्धारित मानकों के अनुसार घी में न्यूनतम 99.5 प्रतिशत मिल्क फैट होना चाहिए। घी में वनस्पति तेल या अन्य वसा की मिलावट मानक के अनुरूप नहीं मानी जाती।


यही वजह है कि त्योहारों से ठीक पहले सामने आई यह जांच केवल कुछ सैंपलों के फेल होने की खबर नहीं है। यह उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करती है जिसके तहत उपभोक्ता पैकेट पर ‘घी’ लिखे उत्पाद को भरोसे के साथ खरीदता है।


विभाग की कार्रवाई जारी रहने का दावा

खाद्य सुरक्षा विभाग ने साफ किया है कि अभियान 25 अगस्त तक सीमित नहीं रहेगा। असुरक्षित और मिलावटी खाद्य पदार्थों के मामलों में संबंधित निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है। दूसरे राज्यों से आने वाली खाद्य सामग्री पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।


त्योहारों के बाजार में दूध, मावा, घी और मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ खाद्य सुरक्षा की यह जांच सीधे उपभोक्ता की थाली से जुड़ती है। ऐसे में सिर्फ विभाग की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय खरीदारी के समय पैकेट की सील, बैच नंबर, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और लेबल पर दर्ज जानकारी को देखना भी जरूरी है।

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