
भोपाल। मध्यप्रदेश में देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए मोहन सरकार ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने की पहल की है। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता के तहत उत्कृष्ट दूध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को 1 लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये तक के पुरस्कार दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, पहले चरण में प्रदेश के 208 वृंदावन ग्रामों में यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। 27 अक्टूबर से शुरू हुई प्रतियोगिता 31 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को समाप्त होगी।
208 गांवों में हो रही प्रतियोगिता, 624 पुरस्कार होंगे वितरित
गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रदेश में पशुपालन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और बेहतर नस्ल की देशी गायों के पालन को बढ़ावा देना है। प्रतियोगिता में सभी वर्गों के पशुपालक हिस्सा ले सकते हैं।
इसमें सर्वाधिक दूध देने वाली गायों के प्रदर्शन के आधार पर उनके पशुपालकों का चयन किया जाएगा। पुरस्कारों का विवरण इस प्रकार है:
प्रथम पुरस्कार: 1 लाख रुपये
द्वितीय पुरस्कार: 50 हजार रुपये
तृतीय पुरस्कार: 25 हजार रुपये
पूरी प्रतियोगिता के अंतर्गत 624 पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए करीब 3 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि वितरित की जाएगी।
गिर और साहीवाल समेत देशी नस्लों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाने और ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता भी इसी लक्ष्य से शुरू की गई है।
योजना में देशी नस्ल की दुधारू गायों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत प्रमुख नस्लें हैं:
गिर
साहीवाल
थारपारकर
मालवी
निवाड़ी
अन्य उन्नत अधिसूचित स्वदेशी नस्लें
सरकार का लक्ष्य वृंदावन ग्रामों को दुग्ध उत्पादन और देशी गोवंश के संरक्षण के आदर्श केंद्र के रूप में विकसित करना है।
2027-28 से प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में होगी प्रतियोगिता
योजना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
आयोजन को व्यवस्थित करने के लिए जिला और विकासखंड स्तर पर समितियां गठित की गई हैं। विकासखंड स्तरीय समिति में अनुभाग अधिकारी (राजस्व) के साथ पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
सरकार की योजना सभी ग्रामों को दुग्ध उत्पादन और देशी पशुधन संवर्धन के आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की है।
मध्यप्रदेश देश में दूध उत्पादन में तीसरे स्थान पर
पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश में प्रतिदिन 6.18 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
डेयरी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं
मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र ने भी उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश में प्रतिदिन 6.18 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जबकि प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। दूध संकलन की क्षमता बढ़कर 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गई है। प्रदेश में अब तक 7,331 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है और इनके सदस्यों को 15.10 करोड़ रुपये का बोनस वितरित किया गया है। इसके अलावा डेयरी प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए करीब 1,547 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।
प्रदेश में दूध संकलन पहले 8 लाख किलोग्राम प्रतिदिन था, जो बढ़कर अब 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया है।
पशुपालकों के लिए 42 लाख तक का ऋण और 33% सब्सिडी
पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था की है। इस योजना में पशुपालकों को 42 लाख रुपये तक का ऋण और 33 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र में सरकार की अन्य प्रमुख पहलें भी शामिल हैं:
डेयरी प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 1,547 करोड़ रुपये की मंजूरी।
गौशालाओं के लिए 620.50 करोड़ रुपये का बजट।
3,243 गौशालाओं के 5.51 लाख गोवंश के भरण-पोषण के लिए 345.4 करोड़ रुपये DBT के माध्यम से अंतरित।
प्रदेश में 406 मोबाइल वेटरनरी यूनिट संचालित।
22.34 लाख पशुपालकों को घर पहुंचकर पशु चिकित्सा सेवाएं।
दूध समृद्धि संपर्क अभियान के तहत 17 लाख से अधिक पशुपालकों से सीधा संवाद।
नस्ल सुधार के लिए 22.5 लाख कृत्रिम गर्भाधान
प्रदेश में बेहतर नस्ल के पशुधन को तैयार करने के लिए नस्ल सुधार अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक 22.5 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं।
इसके अलावा 2.1 लाख सेक्स-सॉर्टेड सीमेन से गर्भाधान कराया गया है। सरकार का जोर देशी गोवंश की गुणवत्ता सुधारने और दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर है।
भोपाल और उज्जैन में डेयरी क्षेत्र को मिली नई सौगात
डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए प्रदेश में कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
भोपाल में 12.42 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक दूध परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत वाले आधुनिक डेयरी प्लांट का भूमिपूजन किया गया।
भोपाल और इंदौर में नए डेयरी संयंत्र शुरू किए गए हैं।
क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में 4,156 गांवों को विकसित किया जा रहा है। इसके दूसरे चरण के लिए 8,357 गांवों का चयन किया गया है।
राष्ट्रीय दूध उत्पादन में MP की हिस्सेदारी 20% करने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी को मौजूदा 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है। गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिता, देशी नस्लों का संरक्षण, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और पशुपालकों को आर्थिक सहायता इसी दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं।
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