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मध्य प्रदेश में 1.24 लाख नए पद मंजूर, 14 बोर्ड जमीन पर उतरे; जानिए किन विभागों में सबसे ज्यादा भर्तियों के अवसर

26 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में 1.24 लाख नए पद मंजूर, 14 बोर्ड जमीन पर उतरे; जानिए किन विभागों में सबसे ज्यादा भर्तियों के अवसर
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी संस्थाओं के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। मोहन सरकार के करीब पौने तीन साल के कार्यकाल में 14 बोर्ड जमीन पर उतारे गए हैं, जबकि विभिन्न विभागों में 1.24 लाख नए पदों को मंजूरी दी गई है।


सरकार का जोर विकास प्राधिकरणों, परिवहन कंपनियों, आयोगों और अन्य संस्थाओं के गठन पर है। खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए जमीनी स्तर पर प्रयासों को और गति देनी होगी।


भोपाल से इंदौर-उज्जैन तक विकास के लिए नई अथॉरिटी

शहरी और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल तथा इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में नई विकास प्राधिकरण बनाने की प्रक्रिया चल रही है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिए राजधानी के साथ आसपास के चिह्नित जिलों को जोड़कर विकास की योजना है।


इसका उद्देश्य बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। इंदौर-उज्जैन और आसपास के जिलों के लिए भी अलग अथॉरिटी गठित की जाएगी।


जबलपुर-इंदौर कॉरिडोर के किनारे विकसित होंगे औद्योगिक क्षेत्र

जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी के गठन को हाल ही में मंजूरी मिली है। इस कंपनी के माध्यम से मौजूदा प्रमुख सड़कों के किनारे औद्योगिक सेक्टर विकसित करने की योजना है। इस पहल में सड़क संपर्क वाले क्षेत्रों को औद्योगिक गतिविधियों के लिए विकसित करने पर जोर रहेगा।


बंद पड़ी लोक परिवहन सेवा को मिला नया स्वरूप

मध्य प्रदेश में सरकार के अधीन 21 साल से बंद लोक परिवहन सेवा को नए स्वरूप में शुरू किया गया है। इसके संचालन को व्यवस्थित करने के लिए एमपी यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाई गई है।


कंपनी ने चुनिंदा मार्गों पर बसों का संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही संभागीय परिवहन कंपनियों को दोबारा खड़ा करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इन कंपनियों के जिम्मे अपने-अपने संभागों में सरकारी लोक परिवहन सेवाओं का नियंत्रण रहेगा।


नर्मदा संरक्षण से पुलिस भर्ती तक नई संस्थाओं की योजना

सरकार ने अलग-अलग जरूरतों के लिए कई संस्थाओं के गठन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इनमें कुछ पर काम जारी है, जबकि कुछ की स्थापना की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है।


* नमन मिशन: नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए काम करेगा। इसका पंजीयन स्वायत्त संस्था के रूप में किया जाएगा।


* एमपी पुलिस भर्ती बोर्ड: पुलिस विभाग में भर्ती के लिए स्वतंत्र बोर्ड बनाने की योजना है। इसका गठन अभी बाकी है।


* एमपी प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग: संभागों, जिलों और तहसीलों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करने के लिए आयोग बनाया गया है।


सीमाओं के पुनर्गठन के लिए आयोग कर रहा अध्ययन

प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं के निर्धारण में हुई गड़बड़ियों से करीब 25 प्रतिशत लोग प्रभावित होने की बात कही गई है। इसी समस्या के समाधान के लिए पहली बार प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग बनाया गया है।


आयोग कई राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर चुका है। इसका उद्देश्य संभाग, जिला और तहसील की सीमाओं से जुड़ी समस्याओं को नए सिरे से देखने का है।


इन विभागों में सबसे ज्यादा नए पद मंजूर

विभिन्न विभागों में स्वीकृत नए पदों में स्वास्थ्य, ऊर्जा और महिला एवं बाल विकास विभाग प्रमुख हैं। विभागवार आंकड़े इस प्रकार हैं:

मध्य प्रदेश में ऊर्जा विभाग में सबसे ज्यादा 52,000 नए पद मंजूर किए गए हैं। इसके बाद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47,000 पद और महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पद स्वीकृत हुए हैं। गृह विभाग में 9,662 पद, परिवहन विभाग में 1,800 पद और 3 नए जिलों के लिए 1,240 पद मंजूर किए गए हैं।


ये पद कैबिनेट से स्वीकृत हैं। इनमें नियमित पदों की संख्या सबसे अधिक है। संविदा और आउटसोर्स के पद भी इस दायरे में शामिल हैं। नए पदों के सृजन के साथ पहले से खाली पदों को भरने की प्रक्रिया भी चल रही है।


पूर्व मुख्य सचिव ने आत्मनिर्भर परिवारों पर दिया जोर

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरदचंद्र बेहार के अनुसार, राज्य की आत्मनिर्भरता परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से जुड़ी है। इसके लिए लोगों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन पहुंचाना जरूरी है।


उन्होंने जमीनी स्तर पर विकेंद्रीकृत और दूरगामी योजनाओं के साथ काम करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, जब तक हर परिवार आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक राज्य की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता।

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