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मोहन सरकार का बड़ा फैसला! 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 1 जुलाई से 5206 बसें सड़कों पर, लाखों यात्रियों को राहत

02 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मोहन सरकार का बड़ा फैसला! 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 1 जुलाई से 5206 बसें सड़कों पर, लाखों यात्रियों को राहत
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। करीब 21 साल बाद प्रदेश की सड़कों पर फिर से सरकारी बसें दौड़ती नजर आएंगी। राज्य सरकार ने 'मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा' शुरू करने का फैसला लिया है, जिसकी शुरुआत 1 जुलाई से होगी। सबसे पहले यह सेवा इंदौर संभाग में शुरू की जाएगी और बाद में इसे प्रदेश के अन्य संभागों तक विस्तार दिया जाएगा।


1164 रूटों पर चलेंगी 5206 बसें

सरकार की योजना के मुताबिक प्रदेशभर में 1164 निर्धारित रूटों पर कुल 5206 बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों को एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी और 7 क्षेत्रीय परिवहन कंपनियों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। पूरे सिस्टम की निगरानी परिवहन विभाग करेगा।


गांव से शहर और दूसरे राज्यों तक मिलेगा कनेक्शन

नई बस सेवा केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। बसें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने के साथ-साथ महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों तक भी जाएंगी।


सीएम मोहन यादव ने दी मंजूरी

सोमवार को हुई राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी की संचालक मंडल बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिवहन विभाग के विस्तृत रोडमैप को मंजूरी दे दी। बैठक में परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने योजना की तैयारियों की जानकारी प्रस्तुत की।


निजी बस ऑपरेटरों के लिए राहत

सरकारी बस सेवा शुरू होने के बाद निजी बस संचालकों के बीच परमिट को लेकर चिंता थी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में निजी ऑपरेटरों को दिए गए परमिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। किसी भी ऑपरेटर को परमिट सरेंडर नहीं करना होगा और नई सेवा अलग रूट तथा समय-सारिणी के आधार पर संचालित होगी।


2005 में बंद हुई थी सरकारी बस सेवा

मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवा का संचालन पहले मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम के माध्यम से होता था। वर्ष 2005 में निगम के बंद होने के बाद प्रदेश की सड़कों से सरकारी बसें पूरी तरह गायब हो गई थीं। अब पहली बार सरकार फिर से सार्वजनिक परिवहन में सीधी भूमिका निभाने जा रही है।


इंदौर बनेगा नई व्यवस्था का केंद्र

परिवहन विभाग के अनुसार इंदौर संभाग इस परियोजना का पहला और सबसे बड़ा केंद्र होगा।

- 121 रूटों पर 608 बसें इंदौर से अन्य जिलों के लिए चलेंगी।

- इंदौर से 101 इंटरस्टेट रूटों पर 276 बसें संचालित होंगी।

- इंदौर से जुड़े 250 इंटरसिटी और इंटरस्टेट रूटों पर 1688 बसें चलाई जाएंगी।


शहरों में भी बढ़ेगी बसों की संख्या

इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर और रीवा में सिटी बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। सिर्फ इंदौर शहर में 28 शहरी और उपनगरीय रूट निर्धारित किए गए हैं, जहां 784 बसें चलेंगी। इनमें 150 पीएम ई-बस सेवा की बसें भी शामिल होंगी।


नई कंपनियों में होगी भर्ती

सरकार ने परिवहन सेवा के संचालन के लिए नई कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया को भी मंजूरी दे दी है। राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी में 7 विभाग बनाए जाएंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय कंपनियों में भी विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

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