
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए बड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने नया सर्कुलर जारी कर अधिकारियों की यात्रा, आवास और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब बिना अनुमति प्रदेश से बाहर सरकारी यात्रा करना आसान नहीं होगा।
बिना मंजूरी प्रदेश से बाहर नहीं जा सकेंगे अधिकारी
नए निर्देशों के अनुसार भारसाधक सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी सरकारी खर्च पर प्रदेश से बाहर तभी जा सकेंगे, जब उन्हें संबंधित भारसाधक सचिव की अनुमति मिलेगी। वहीं भारसाधक सचिवों को भी ऐसी यात्रा के लिए मुख्य सचिव से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। साथ ही हर महीने प्रदेश से बाहर हुई यात्राओं की जानकारी मुख्य सचिव को भेजनी होगी।
निजी होटलों में ठहरने पर रोक
सरकार ने अधिकारियों के निजी होटलों में ठहरने पर भी रोक लगा दी है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों की यात्रा के दौरान अधिकारियों को राज्य के आवासीय आयुक्त के माध्यम से उपलब्ध सरकारी आवास सुविधाओं का उपयोग करना होगा।
ऑनलाइन बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन बैठकों का आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया जा सकता है, उनके लिए अधिकारियों का एक स्थान पर एकत्र होना आवश्यक नहीं होगा। इससे यात्रा और अन्य प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी।
वाहन पूल और ई-व्हीकल पर रहेगा जोर
सभी विभागों को वाहन पूलिंग अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए भी कहा गया है।
हर विभाग को दिए गए अलग-अलग निर्देश
सरकार ने केवल यात्रा खर्च ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए हैं।
- कृषि विभाग को जैविक और प्राकृतिक खाद के उपयोग के प्रति किसानों को जागरूक करना होगा।
- खाद्य विभाग को पीएनजी नेटवर्क के विस्तार और उज्ज्वला व एलपीजी के डुप्लीकेट कनेक्शन चिन्हित कर निरस्त करने की कार्रवाई तेज करनी होगी।
- सभी सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जाएगा।
- खनिज विभाग को विदेशी आयात पर निर्भर क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी स्वीकृतियों और लीज प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूरा करना होगा।
स्वास्थ्य विभाग चलाएगा जागरूकता अभियान
सरकार ने आम नागरिकों को भी ऊर्जा बचत और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कम तेल का उपयोग करने की सलाह दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चलाएगा।
पीएम की अपील के बाद सख्ती
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन संकट को देखते हुए अनावश्यक यात्राएं कम करने, वाहन पूलिंग अपनाने और संसाधनों की बचत पर जोर दिया था। इसके बाद प्रदेश के कई मंत्री और विधायकों ने भी अपने वाहन काफिलों में कटौती की थी। अब इसी दिशा में अधिकारियों के सरकारी खर्चों पर भी नियंत्रण की पहल की गई है.
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