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MP Heat Wave: भीषण गर्मी से बच्चे बीमार, भोपाल में स्कूल छुट्टी की मांग तेज, कलेक्टर के फैसले पर टिकी नजरें

24 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Heat Wave: भीषण गर्मी से बच्चे बीमार, भोपाल में स्कूल छुट्टी की मांग तेज, कलेक्टर के फैसले पर टिकी नजरें
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। MP Heat Wave ने अब बच्चों की सेहत पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है। भोपाल में कई छात्र बीमार पड़े हैं और अभिभावकों ने स्कूलों में छुट्टी घोषित करने की मांग तेज कर दी है। प्रशासन भी अब एक्शन मोड में नजर आ रहा है।


बच्चों की तबीयत बिगड़ी, स्कूल से लौटना बना सबसे बड़ा खतरा

भीषण गर्मी के बीच सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को स्कूल से लौटते वक्त हो रही है। दोपहर में बस और वैन गर्म चैंबर जैसी बन जाती हैं, जिससे बच्चों की हालत खराब हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि कई बच्चों को चक्कर, उल्टी और कमजोरी की शिकायत हो रही है—और यही चिंता अब बड़े फैसले की मांग में बदल रही है।


रोज 3-4 घंटे सफर, गर्मी में और बढ़ी मुश्किल

पैरेंट्स के मुताबिक शहर के कई स्कूल बाहरी इलाकों में हैं, जहां आने-जाने में ही 3 से 4 घंटे लग जाते हैं। दोपहर 12 बजे छुट्टी के बाद बच्चे 1:30 से 2 बजे घर पहुंचते हैं, जो दिन का सबसे गर्म समय होता है। ऐसे में सफर बच्चों के लिए खतरा बनता जा रहा है—और यही मुद्दा प्रशासन तक पहुंच चुका है।


कई स्कूलों ने बदला समय, नर्सरी-प्राइमरी को राहत

स्थिति को देखते हुए राजधानी के करीब आधा दर्जन स्कूलों ने अपने स्तर पर कदम उठाए हैं। नर्सरी और प्राइमरी कक्षाओं का समय बदलकर सुबह 10:30 बजे कर दिया गया है। इसकी जानकारी अभिभावकों को मैसेज के जरिए दी गई। हालांकि बाकी कक्षाओं का समय अभी जस का तस है—जो सवाल खड़े कर रहा है।


प्रशासन एक्टिव, छुट्टी का प्रस्ताव तैयार

जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायतों के आधार पर स्कूल अवकाश का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा जाएगा और मंजूरी मिलते ही आदेश लागू हो सकता है। यानी अब फैसला बस एक प्रशासनिक मंजूरी पर टिका है—जिसका इंतजार हजारों परिवार कर रहे हैं।


2000 स्कूलों के बच्चे प्रभावित, फैसले पर टिकी उम्मीद

भोपाल में करीब 2000 स्कूलों के बच्चे इस भीषण गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावकों की मांग साफ है—जब तक तापमान कम नहीं होता, तब तक स्कूल बंद किए जाएं। अब सबकी नजर कलेक्टर के अगले आदेश पर है—जो तय करेगा कि बच्चों को राहत कब मिलेगी।

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