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AI से चलेगी न्याय व्यवस्था, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लॉन्च किया नया डिजिटल सिस्टम

18 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
AI से चलेगी न्याय व्यवस्था, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने लॉन्च किया नया डिजिटल सिस्टम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्याय व्यवस्था को तेज और हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब देश का पहला “एकीकृत डिजिटल न्याय मॉडल” शुरू किया गया है, जिससे कोर्ट, पुलिस, जेल, फॉरेंसिक और मेडिकल विभाग एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़ जाएंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य मामलों का तेजी से निपटारा करना और लोगों को अदालतों के चक्कर से राहत देना है।


CJI की मौजूदगी में लॉन्च हुआ सिस्टम

इस डिजिटल मॉडल का शुभारंभ शनिवार को जबलपुर में हुआ। कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा मौजूद रहे। न्यायपालिका के अधिकारियों के मुताबिक, यह मॉडल देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर लागू किया गया है।


जमानत के 10 मिनट बाद हो सकेगी रिहाई

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अदालत और जेल का सिस्टम सीधे जुड़ जाएगा। अब जैसे ही कोर्ट से जमानत आदेश जारी होगा, उसकी जानकारी तुरंत जेल प्रशासन तक पहुंच जाएगी। इससे कैदियों की रिहाई में लगने वाला समय घटकर लगभग 10 मिनट रह जाएगा। पहले कई मामलों में रिहाई प्रक्रिया पूरी होने में घंटों या कई बार दिनों तक का समय लग जाता था।


मोबाइल पर मिलेंगे कोर्ट के आदेश

नई व्यवस्था में लोगों को कोर्ट से प्रमाणित कॉपी लेने के लिए बार-बार कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा। फीस जमा होते ही आदेश और जरूरी दस्तावेज सीधे वॉट्सएप और ईमेल पर भेज दिए जाएंगे। केस से जुड़े नोटिस और अपडेट भी मोबाइल पर मिल सकेंगे।


24 घंटे ऑनलाइन रहेंगी सुविधाएं

अब नागरिक किसी भी समय ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। केस की स्थिति, दस्तावेज और अन्य जानकारी 24X7 उपलब्ध रहेगी। इससे समय की बचत होगी और लोगों को अदालतों में लंबी लाइन से राहत मिलेगी।


AI करेगा बड़ी फाइलों का सार तैयार

इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया गया है। AI बड़े मामलों की छोटी समरी तैयार करेगा, जिससे जज और वकीलों को लंबी फाइलें पढ़ने में कम समय लगेगा। इससे सुनवाई प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।


रिकॉर्ड से छेड़छाड़ मुश्किल होगी

नई डिजिटल व्यवस्था में फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाएंगी। इससे रिकॉर्ड गायब होने या उसमें बदलाव की संभावना काफी कम हो जाएगी। साथ ही हर आरोपी की एक यूनिक डिजिटल पहचान बनाई जाएगी, जिससे उसकी ट्रैकिंग आसान होगी।

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