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MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 39 साल बाद किसानों को मिला बढ़ा हुआ मुआवजा

19 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 39 साल बाद किसानों को मिला बढ़ा हुआ मुआवजा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

करीब 39 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे शिवपुरी के किसानों को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने चर्चित संत फार्म भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त मुआवजे को सही ठहराया है। अदालत ने 5 रुपये प्रति वर्गफीट की जगह 9 रुपये प्रति वर्गफीट मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा।


1987-88 में रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित हुई थी जमीन

पूरा विवाद 1987-88 का है। उस समय ग्वालियर-गुना ब्रॉडगेज रेलवे लाइन, रेलवे स्टेशन और लिंक रोड निर्माण के लिए शिवपुरी जिले के ग्राम जगतपुर स्थित संत फार्म की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था। रेलवे लाइन और सड़क खेतों के बीच से गुजरने के कारण पूरा फार्म दो हिस्सों में बंट गया, जिससे खेती करना किसानों के लिए मुश्किल हो गया।


सिंचाई प्रभावित हुई, फसल का भी हुआ नुकसान

भूमि अधिग्रहण के बाद खेतों तक सिंचाई पहुंचाना कठिन हो गया। इसका सीधा असर खेती और उत्पादन पर पड़ा। किसानों का कहना था कि खेतों के विभाजन से उनकी बची हुई जमीन की उपयोगिता भी कम हो गई और उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद फिर हुई सुनवाई

भू-स्वामी हिम्मत सिंह और अन्य किसानों का मामला जिला अदालत से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वर्ष 2013 में शीर्ष अदालत ने भूमि विभाजन, तारबंदी हटाने और कृषि नुकसान के आकलन जैसे मुद्दों पर मामले को दोबारा रेफरेंस कोर्ट भेजा था। इसके बाद जिला अदालत ने 2019 में किसानों के पक्ष में अतिरिक्त मुआवजा तय किया।


रेलवे की अपील हाईकोर्ट ने की खारिज

जिला अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए रेलवे ने हाईकोर्ट में अपील दायर की और अतिरिक्त मुआवजे को काल्पनिक बताया। हालांकि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि भूमि के विभाजन और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों को वास्तविक नुकसान हुआ है। इसी आधार पर अदालत ने रेलवे की दलीलों को खारिज करते हुए जिला अदालत के फैसले को बरकरार रखा।


भविष्य के भूमि अधिग्रहण मामलों के लिए भी अहम फैसला

यह फैसला सिर्फ संत फार्म के किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में आने वाले ऐसे सभी भूमि अधिग्रहण मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां अधिग्रहण के बाद बची हुई जमीन की उपयोगिता प्रभावित होती है। अदालत के इस निर्णय से लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे किसानों को बड़ी राहत मिली है।

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