
भोपाल। दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद अब मध्य प्रदेश की ऊंची इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश में 1000 से अधिक हाईराइज भवन मौजूद हैं, लेकिन आग लगने की स्थिति में राहत और बचाव के संसाधन बेहद सीमित हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि राजधानी भोपाल को छोड़ दें तो अधिकांश नगरीय निकायों के पास 18 मंजिल तक पहुंचने वाला हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसी बड़े हादसे की स्थिति में बचाव कार्य चुनौती बन सकता है।
इंदौर जैसे बड़े शहर में भी नहीं है हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म
प्रदेश का सबसे बड़ा और तेजी से विकसित हो रहा शहर इंदौर भी इस मामले में पीछे है। जानकारी के अनुसार इंदौर फायर ब्रिगेड के पास एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची इमारतों में आग लगने पर सामान्य दमकल वाहन प्रभावी नहीं होते। ऐसे में आधुनिक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और हाई-राइज रेस्क्यू सिस्टम बेहद जरूरी हैं।
भोपाल के पास है एकमात्र 171 फीट प्लेटफॉर्म
फिलहाल मध्य प्रदेश में केवल भोपाल नगर निगम के पास 171 फीट ऊंचाई तक पहुंचने वाला हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक मशीन पूरे शहर की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती, खासकर तब जब लगातार नई हाईराइज इमारतें बन रही हों।
फायर सिस्टम मेंटेनेंस न होने से बढ़ा खतरा
कई हाईराइज इमारतों में लगाए गए फायर फाइटिंग सिस्टम वर्षों से उचित रखरखाव और मॉक ड्रिल के अभाव में निष्क्रिय होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम और इमरजेंसी निकास व्यवस्था का समय-समय पर परीक्षण नहीं होने से दुर्घटना के समय बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
छह साल में 35 लोगों की गई जान
प्रदेश में बीते कुछ वर्षों के दौरान आग की कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं।
- इंदौर स्वर्णबाग कॉलोनी (2022) : 7 मौतें
- इंदौर बृजेश्वरी एनेक्स (2026) : 8 मौतें
- ग्वालियर (2020) : 7 मौतें
- जबलपुर न्यू लाइफ अस्पताल (2022) : 8 मौतें
- देवास (2024) : 4 मौतें
इन घटनाओं में कुल 35 लोगों की जान जा चुकी है। कई मामलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी सामने आई थी।
भोपाल के होटल और रेस्टोरेंट भी सुरक्षित नहीं
राजधानी भोपाल में की गई पड़ताल ने भी चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। शहर में करीब 3200 होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 38 संस्थानों के पास फायर एनओसी है। वहीं सिर्फ 463 होटल-रेस्टोरेंट में दो या उससे अधिक एंट्री-एग्जिट पॉइंट मौजूद हैं। ऐसे में आग लगने की स्थिति में लोगों के बाहर निकलने के रास्ते सीमित हो सकते हैं।
रूफटॉप रेस्टोरेंट बन रहे नई चुनौती
भोपाल में पिछले कुछ वर्षों में रूफटॉप रेस्टोरेंट, लाउंज और पार्टी स्पेस तेजी से बढ़े हैं। इनकी संख्या 300 से अधिक बताई जा रही है। इनमें से कई स्थानों पर ऊपर पहुंचने का मुख्य साधन केवल लिफ्ट होती है। आग लगने की स्थिति में लिफ्ट बंद हो जाए तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है।
भोपाल में भी सामने आ चुके हैं बड़े हादसे
- जून 2024 : हमीदिया रोड स्थित होटल में शॉर्ट सर्किट से आग
- दिसंबर 2024 : एमपी नगर मॉल के बेसमेंट गोदाम में आग
- अक्टूबर 2025 : न्यू मार्केट के कपड़ा शोरूम में आग
इन घटनाओं ने भी फायर सेफ्टी मानकों को लेकर कई सवाल खड़े किए थे।
दिल्ली हादसे ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल और रेस्टोरेंट में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जबकि 37 लोग घायल हुए। राहत टीमों ने करीब 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन कई लोग धुएं और आग से बचने के लिए इमारत से कूदने को मजबूर हो गए। इस हादसे ने देशभर में हाईराइज और होटल फायर सेफ्टी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

