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MP Intern Doctors Protest: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर तीसरे दिन भी आंदोलन, भोपाल समेत प्रदेश में ओपीडी सेवाएं प्रभावित

09 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Intern Doctors Protest: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर तीसरे दिन भी आंदोलन, भोपाल समेत प्रदेश में ओपीडी सेवाएं प्रभावित
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में चल रहा आंदोलन 9 सितंबर को तीसरे दिन भी जारी है। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बुधवार सुबह ओपीडी बंद रहने के साथ जूनियर और सीनियर डॉक्टरों के एक वर्ग ने भी गैर-जरूरी सेवाओं से दूरी बनाने का फैसला किया है।


आंदोलन के बीच सरकार इंटर्न डॉक्टरों से बातचीत कर रही है। डॉक्टरों की मांगों और सोमवार की पुलिस कार्रवाई पर ठोस निर्णय होने की स्थिति में आज आंदोलन के आगे की दिशा तय हो सकती है।


भोपाल में सड़क पर बैठे इंटर्न डॉक्टर

आंदोलन का सबसे बड़ा प्रदर्शन भोपाल के कमला पार्क के पास चल रहा है। इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे स्थान नहीं छोड़ेंगे।


पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रहे हैं। इसका एक उद्देश्य सड़क पर बैठे डॉक्टरों के प्रदर्शन के कारण आम लोगों को होने वाली यातायात संबंधी परेशानी को कम करना भी है।


सीनियर रेजिडेंट्स ने भी किया ओपीडी बहिष्कार

इंटर्न डॉक्टरों के समर्थन में GMC भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स भी आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के बाद सीनियर रेजिडेंट्स ने सामूहिक रूप से ओपीडी और अन्य गैर-जरूरी सेवाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है।


बुधवार को सीनियर रेजिडेंट्स भी ओपीडी में मरीजों को नहीं देखेंगे। इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी।


9 सितंबर को जूनियर डॉक्टर भी रहेंगे ओपीडी से दूर

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) ने 9 सितंबर के लिए भी नियमित ओपीडी और इलेक्टिव ओटी के बहिष्कार का निर्णय बरकरार रखा है।


जूडा के मुताबिक, इस बहिष्कार से इमरजेंसी सेवाओं को अलग रखा गया है। यानी आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पहले की तरह संचालित होती रहेगी।


स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग, लाठीचार्ज का भी विरोध

इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांग स्टाइपेंड में बढ़ोतरी है। प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी डॉक्टरों में विरोध है।


डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर ठोस फैसला होने के साथ सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय होना जरूरी है। इसके बाद ही आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।


मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने जताई नाराजगी

मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर प्रदेशभर के डॉक्टरों में नाराजगी है।


एसोसिएशन का कहना है कि डॉक्टरों की मांगों का हल बल प्रयोग से नहीं निकाला जाना चाहिए। उसके अनुसार बातचीत और संवेदनशील तरीके से मामले को सुलझाना अधिक उचित है।


मरीजों की परेशानी के बीच सरकार पर समाधान का दबाव

आंदोलन के कारण सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है।


अब सरकार के सामने स्टाइपेंड की मांग, पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल और अस्पतालों में प्रभावित हो रही गैर-जरूरी सेवाओं के बीच जल्द समाधान निकालने की चुनौती है।

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