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जैव-विविधता में एमपी को देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के तौर पर किया जा रहा विकसित: डॉ. मोहन यादव

22 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
जैव-विविधता में एमपी को देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के तौर पर किया जा रहा विकसित: डॉ. मोहन यादव
Hitesh Kumar Singh
डेस्क रिपोर्टर
Hitesh Kumar Singh

भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान में शुक्रवार को आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम व चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैव-विविधता में एमपी को देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमारे पास 'टाइगर स्टेट', 'लेपर्ड स्टेट', 'चीता स्टेट', 'वल्चर स्टेट', 'घड़ियाल स्टेट', 'वुल्फ स्टेट' का टाइटल है। 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सालों पहले देश की धरती से चीते लुप्त हो चुके थे। हम देश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले चीतों को प्रदेश की धरती में वापस ले आये हैं। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का गौरव देने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि चीतों ने पालपुर कूनो और गांधी सागर अभयारण्य को अपना घर मान लिया है। प्रदेश में अब कुल 53 चीते हैं। मध्यप्रदेश वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक रोल मॉडल बनकर उभरा है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, करीब 500 पक्षियों की प्रजातियां और 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो मध्यप्रदेश के जंगलों में 100 से ज्यादा हाथी भी विचरण कर रहे हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, मंत्रालय के केन्द्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।


एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का किया शुभारंभ 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता एवं जन-जागरुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर चीता संरक्षण पर केंद्रित ब्रोशर, भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026 एवं अन्य प्रचार साहित्य का विमोचन कर अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस की स्मृति में डाक विभाग का 'माय स्टैम्प' (5 रुपए का डाक टिकट) भी लाँच किया गया। 


डेटा ड्रिवन लैब का भी किया गया लोकार्पण 

आईआईएफएम में नवस्थापित डेटा संचालित प्रयोगशाला (डेटा ड्रिवन लैब) का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, प्रदेश की जैव-विविधता विरासत स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म, मप्र राज्य जैव-विविधता बोर्ड द्वारा संरक्षित तपोवन भूमि स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय वन मंत्री ने प्रदेश के वन विभाग के मैदानी अमले के लिए न्यू बाइक्स एवं रेस्क्यू व्हीकल को हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। मुख्यमंत्री ने आकर्षक स्वागत नृत्य करने वाले जनजातीय कलाकारों में प्रत्येक को इनाम स्वरूप 10 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।


56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महाभियान चल रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्य हो रहा है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ रुपये की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ-सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महाभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों ने अपनी भागीदारी की है। जल और जंगल के संरक्षण तथा जमीन उर्वरता बचाए रखने में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन है। 


जैव-विविधता भारतीय सभ्यता की मूल आत्मा: भूपेन्द्र यादव

केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भारत की प्राचीन नदी सभ्यताओं में नर्मदा का विशेष स्थान है। प्रदेश में अमरकंटक और पातालकोट धरती पर ईश्वर का दिया सबसे बड़ा उपहार है। जैव-विविधता हमारी भारतीय सभ्यता की मूल आत्मा है, इन्हें बनाए रखना ही हमारा संकल्प है, हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि जिसे हम बना नहीं सकते, कम से कम उसे बिगाड़े तो नहीं। धरती पर उपलब्ध जैव-विविधता से हमें भोजन, दवाई और जीवन मिलता है। 


जैव-विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जैव-विविधता हमारी अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करती है। आजकल ग्रीन हाउस गैस और कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है। जैव-विविधता कार्बन को सोखने का भी कार्य करती है। धरती पर 30 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। भारत में 23 प्रतिशत भूमि पर वन हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कार्बन उत्सर्जन कम करने के अपने लक्ष्य का 90 प्रतिशत हासिल कर लिया है। वर्ष 2030 तक हम इस लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूर्ण करेंगे। 


हमारा देश जैव-विविधता के संरक्षण में दुनिया का नेतृत्व करता है: कीर्तिवर्धन सिंह

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर दुनिया के देश जलवायु परिवर्तन पर चर्चा कर रही है। जैव-विविधता के संरक्षण से भावी पीढ़ियों के पर्यावरण को बचाया जा सकता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि 10 तालाबों के बराबर एक पुत्र है। 10 पुत्र के बराबर एक वृक्ष है। हमारा देश जैव-विविधता के संरक्षण में दुनिया का नेतृत्व करता है। आजकल बारिश का पैटर्न बदलने से हमारी खेती पर असर पड़ा है। कोरल रीफ जलीय जैव-विविधता का महत्वपूर्ण अंग है, धरती का तापमान और कार्बन डाइ-ऑक्साइड बढ़ने से यह रीफ तेजी से खत्म हो रही है। 


देश में स्थानीय स्तर पर 2 लाख से अधिक जैव-विविधता समितियां

कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मिशन लाइफ की पहल की है, जिसे विश्वस्तर पर सराहा गया है। देश में स्थानीय स्तर पर 2 लाख से अधिक जैव-विविधता समितियां बनाई गई हैं। प्रोजेक्ट चीता दुनिया का पहला इंटर क्वांटिनेंटल ट्रांसफर रहा है। पयार्वरण की परिस्थितियों में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षियों की संख्या तेजी से घटी है। कई दुर्लभ प्रजातियां हमें देखने को नहीं मिलती हैं। जैव-विविधता का संरक्षण केवल जंगलों में नहीं, हमारे घरों की बालकनी में भी हो सकता है। हमें अपने घरों की बालकनी में एक छोटा जैव-विविधता पार्क बनाना चाहिए। 


कार्यक्रम में इन्होंने भी रखे अपने विचार 

कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस के डायरेक्टर जनरल डॉ. एसपी यादव हमने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में केन्द्रीय सचिव, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तन्मय कुमार, डीजी फॉरेस्ट, केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय सुशील अवस्थी, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के डायरेक्टर के. रविचंद्रन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) समिता राजौरा, सुप्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिकगण, भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी, पोस्ट मास्टर जनरल म.प्र. परिक्षेत्र, वन एवं प्रकृति प्रेमी और बड़ी संख्या में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के विद्यार्थी उपस्थित थे। अंत में केन्द्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण के चैयरमेन वीरेन्द्र आर तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।



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