
भोपाल। मध्य प्रदेश में पानी बचाने और जल स्रोतों को मजबूत करने के लिए सरकार एक बार फिर बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का तीसरा चरण 19 मार्च से शुरू होगा। इस बार अभियान का शुभारंभ उज्जैन में शिप्रा नदी के तट से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। राज्य सरकार के मुताबिक यह अभियान 30 जून तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा, जिसमें जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रदेश में हजारों जल संरचनाओं पर काम जारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस समय प्रदेश में करीब 64 हजार 395 जल संरचनाओं के निर्माण और सुधार का कार्य चल रहा है। इन परियोजनाओं के तहत तालाब, चेक डैम, खेत तालाब, नहरें और स्टॉप डैम जैसी संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन प्रयासों से भविष्य में पानी की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत मिल सके और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो।
मुख्यमंत्री बोले: हर नागरिक की जिम्मेदारी है पानी बचाना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि नागरिक सक्रिय भूमिका निभाएं तो मध्य प्रदेश जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन सकता है। सरकार इस अभियान के जरिए लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें सीधे जोड़ने की कोशिश कर रही है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ी पानी की चुनौती
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बदलते मौसम और अनियमित बारिश के कारण जल संकट की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। ऐसे समय में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में काम करना बेहद जरूरी हो गया है। पहले गांवों में तालाब, कुएं और बावड़ियां केवल पानी का स्रोत नहीं बल्कि सामाजिक जीवन का हिस्सा हुआ करती थीं। सरकार अब उसी परंपरा को आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहयोग के साथ फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
गांव-गांव में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
इस अभियान के दौरान प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके तहत कई गतिविधियां आयोजित होंगी, जैसे: वर्षा जल संचयन के तरीके समझाना, भूजल स्तर बढ़ाने के उपाय बताना, तालाब और कुओं की सफाई के लिए श्रमदान और जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान। सरकार लोगों से अपील कर रही है कि वे अपने घरों और खेतों में भी पानी बचाने के उपाय अपनाएं।
अभियान से किसानों और पर्यावरण को फायदा
सरकार का मानना है कि इस पहल से कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। साथ ही कम वर्षा वाले इलाकों में जल उपलब्धता बेहतर होगी। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलेगा।
पहले दो चरणों में बने लाखों जल ढांचे
- इस अभियान के पिछले चरणों में भी बड़े पैमाने पर काम हुआ है।
- 2024 में पहले चरण के दौरान लगभग 2.79 लाख जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया।
- 2025 में दूसरे चरण में 72,647 से अधिक संरचनाएं तैयार की गईं।
अब तीसरे चरण में हजारों नई परियोजनाओं पर काम जारी है, जिनमें तालाब, चेक डैम, नहरें और अन्य जल संचयन व्यवस्थाएं शामिल हैं।
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