
भोपाल। मध्य प्रदेश में खत्म हुआ कृषि महोत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं रहा—यह किसानों के भविष्य का नया रोडमैप बन गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ कहा, अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने का समय है।
AI और टेक्नोलॉजी से बदलेगी खेती की तस्वीर
गडकरी ने किसानों को चेताया कि सिर्फ पारंपरिक खेती से अब काम नहीं चलेगा। उन्होंने खेती को AI, सैटेलाइट डेटा और ड्रोन तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही किसान सफल होगा जो तकनीक अपनाएगा और स्मार्ट तरीके से उत्पादन करेगा—यही बदलाव की असली शुरुआत है।
किसान बनें ‘ऊर्जादाता’, कमाई के नए रास्ते खुलेंगे
गडकरी का सबसे बड़ा फोकस किसानों की आय बढ़ाने पर रहा। उन्होंने सुझाव दिया कि किसान सिर्फ फसल तक सीमित न रहें, बल्कि पराली और कृषि अवशेषों से इथेनॉल, CNG और हाइड्रोजन बनाएं। इससे न सिर्फ आयात कम होगा, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। यानी किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन सकता है—यहीं से गेम बदलता दिख रहा है।
रायसेन में रिंग रोड और पुलों के सौंदर्यीकरण को मंजूरी
इवेंट के दौरान गडकरी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी बड़ी घोषणा की। रायसेन रिंग रोड (पूर्वी बायपास) के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई और DPR तैयार करने की बात कही गई। इसके साथ ही नर्मदापुरम के नर्मदा पुल सहित कई पुलों के सौंदर्यीकरण को भी मंजूरी मिली, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
‘गांव का पानी गांव में’—जल प्रबंधन पर बड़ा जोर
गडकरी ने जल संरक्षण को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि भूजल पुनर्भरण बैंक डिपॉजिट जैसा है, जिसे नियमित रूप से बढ़ाना जरूरी है। उनका संदेश साफ था—अगर पानी बचा रहेगा तो खेती टिकाऊ बनेगी, वरना आने वाले समय में संकट और गहराएगा।
शिवराज का बड़ा प्लान: हर ब्लॉक में बनेगा बीज ग्राम
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के लिए विस्तृत योजना का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि बीज से बाजार तक पूरा रोडमैप तैयार है। हर ब्लॉक में बीज ग्राम, पंचायत स्तर पर मशीन बैंक और कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए जाएंगे—जिससे छोटे किसानों को भी तकनीक का लाभ मिल सकेगा।
रायसेन बनेगा हॉर्टिकल्चर हब, टास्क फोर्स करेगी निगरानी
शिवराज ने रायसेन को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित करने की घोषणा की। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति और विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी। इससे योजनाओं की निगरानी होगी और जमीन पर तेजी से काम होगा—यानी योजनाएं सिर्फ कागज तक सीमित नहीं रहेंगी।
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