
मध्य प्रदेश में अब कमर्शियल LPG सिलेंडर हर किसी को पहले जैसा नहीं मिलेगा। सरकार ने नई व्यवस्था लागू करते हुए साफ कर दिया है कि जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि होटल-रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों को सीमित गैस ही मिलेगी।
जरूरी सेवाओं को पहली प्राथमिकता
मध्य प्रदेश शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा जारी नए आदेश में गैस वितरण का पूरा ढांचा बदल दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत:
- 30% LPG शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों को
- 35% LPG पुलिस, सुरक्षा बल, महिला एवं बाल विकास और अन्य आवश्यक सेवाओं को
यानी कुल मिलाकर आधे से ज्यादा गैस अब सीधे जरूरी सेवाओं के लिए रिजर्व रहेगी।
होटल-रेस्टोरेंट पर असर
नई गाइडलाइन में सबसे बड़ा असर होटल और फूड बिजनेस पर पड़ा है।
किसे कितनी गैस मिलेगी?
होटल: 9%
रेस्टोरेंट: 9%
ढाबा और स्ट्रीट फूड विक्रेता: 7%
इसके अलावा:
उद्योग: 5%
अन्य उपभोक्ता: 5%
यानी पहले की तुलना में इन सेक्टरों को अब काफी सीमित गैस मिलेगी।
खपत के हिसाब से होगा आवंटन
- सरकार ने एक और बड़ा नियम लागू किया है।
- गैस का वितरण अब पिछले 3 महीनों की औसत खपत के आधार पर होगा
- सभी बुकिंग ऑनलाइन करनी होगी
- पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य रहेगा
इसका मकसद साफ है — जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना
जिला प्रशासन को सख्त निर्देश
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को साफ निर्देश दिए हैं कि पूरे सिस्टम की निगरानी करें, नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई करें। आदेश में यह भी कहा गया है कि उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि: गैस की उपलब्धता संतुलित रहे। अस्पताल और जरूरी सेवाओं में कोई कमी न आए। संकट की स्थिति में प्राथमिक जरूरतें प्रभावित न हों। हालांकि, इसका असर छोटे व्यापारियों और फूड इंडस्ट्री पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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