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एम्स भोपाल की तकनीक से बदलेगी मातृ-शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था, महिला-बाल विकास विभाग करेगा बड़ा समझौता

10 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एम्स भोपाल की तकनीक से बदलेगी मातृ-शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था, महिला-बाल विकास विभाग करेगा बड़ा समझौता
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग जल्द ही एम्स भोपाल के साथ महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) करेगा। इसका उद्देश्य दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ पहुंचाना है।


महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस साझेदारी को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को गंभीर कुपोषण की पहचान और समय पर उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों से विशेष क्लिनिकल प्रशिक्षण दिया जाएगा।


एम्स की तकनीक से मजबूत होगी स्वास्थ्य व्यवस्था

एमओयू महिला एवं बाल विकास विभाग और एम्स भोपाल के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा स्टेट टेक्निकल सपोर्ट यूनिट के बीच होगा। इस पहल के जरिए फ्रंटलाइन वर्कर्स को तकनीकी और चिकित्सा विशेषज्ञता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे बच्चों और महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गुणवत्ता बेहतर होगी।


डेटा आधारित फैसलों पर रहेगा फोकस

मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल की तकनीकी सहायता से आंगनवाड़ी केंद्रों और फ्रंटलाइन वर्कर्स की क्षमता बढ़ेगी। इससे सटीक आंकड़ों के आधार पर नीति निर्माण और बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।


झाबुआ और धार से शुरू हुआ प्रशिक्षण

नई व्यवस्था के तहत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टर और तकनीकी टीम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर्स और परियोजना अधिकारियों को विशेष चिकित्सा एवं तकनीकी प्रशिक्षण देंगे। मंत्री ने बताया कि झाबुआ और धार जैसे जनजातीय बहुल जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है।


कुपोषण पर भी चल रहा विशेष शोध

एम्स भोपाल के विशेषज्ञ गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चों के स्वास्थ्य पर अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही आईसीएमआर (ICMR) और एनसीओई (NCOE), नई दिल्ली के सहयोग से बेहतर अनुपूरक आहार (THR) तथा परिवारों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC) पर भी शोध किया जा रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक डेटा के आधार पर समय रहते गंभीर रूप से बीमार और कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका उपचार किया जा सकेगा, जिससे कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है।


बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद


समीक्षा बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता, एम्स भोपाल के सीएफएम विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण एम. कोकने (PI & HOD), नोडल अधिकारी डॉ. अभिजीत पाखरे, राज्य समन्वयक दीपक पाण्डेय सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



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