
भोपाल। मध्य प्रदेश में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों और उनके परिवारों के लिए निजी मेडिकल कॉलेज से MBBS करना अब पहले से महंगा होगा। प्रदेश में 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों की MBBS फीस करीब 10 फीसदी बढ़ा दी गई है। नई फीस के मुताबिक सालाना शुल्क करीब 18.08 लाख रुपए तक पहुंच गया है। पिछले सत्र में यह करीब 16.50 लाख रुपए था। यानी छात्रों को सालाना करीब 1.58 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
वहीं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को इस बढ़ोतरी से राहत मिली है। प्रदेश के 20 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस 1.14 लाख रुपए ही रहेगी। इसमें 1 लाख रुपए ट्यूशन फीस और 14 हजार रुपए कॉशन मनी शामिल है।
नई फीस संरचना चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) की ओर से जारी की गई है और इसे NEET UG 2026-27 काउंसलिंग में लागू किया जाएगा।
निजी कॉलेज में एक साल की फीस 18 लाख के पार
निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस बढ़ने के बाद मेडिकल शिक्षा का खर्च और बढ़ गया है। पिछले साल करीब 16.50 लाख रुपए की फीस के मुकाबले अब यह करीब 18.08 लाख रुपए हो गई है।
नई फीस में 25 हजार रुपए कॉशन मनी भी शामिल है। इसका मतलब है कि सिर्फ कॉलेज की फीस के स्तर पर ही निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
सरकारी कॉलेज में जहां सालाना शुल्क 1.14 लाख रुपए है, वहीं निजी कॉलेज में यही खर्च करीब 18.08 लाख रुपए तक पहुंच गया है। यानी दोनों के बीच सालाना फीस में करीब 16.94 लाख रुपए का अंतर है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज में फीस जस की तस
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में इस साल कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्रों को पिछले सत्र की तरह 1 लाख रुपए ट्यूशन फीस और 14 हजार रुपए कॉशन मनी, यानी कुल 1.14 लाख रुपए जमा करने होंगे।
हालांकि, सरकारी कॉलेज की कम फीस का लाभ सीमित सीटों और NEET UG में मेरिट के आधार पर प्रवेश पाने वाले छात्रों को ही मिलेगा। इसलिए छात्रों के लिए बेहतर रैंक हासिल करना सबसे अहम रहेगा।
NRI कोटे से MBBS भी महंगा
निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे की सीटों पर MBBS करने वाले छात्रों के लिए भी फीस बढ़ाई गई है। 2026-27 सत्र में अलग-अलग निजी कॉलेजों में NRI कोटे की फीस करीब 33.9 लाख रुपए से 53.5 लाख रुपए सालाना तक बताई गई है। फीस कॉलेज के अनुसार अलग-अलग है।
इससे NRI कोटे के जरिए मेडिकल शिक्षा लेने वाले परिवारों का बजट भी पहले की तुलना में बढ़ेगा।
BDS की फीस में भी बढ़ोतरी
MBBS के साथ-साथ निजी मेडिकल कॉलेजों में BDS की फीस भी करीब 8 फीसदी बढ़ाई गई है। यानी मेडिकल के साथ डेंटल शिक्षा लेने वाले छात्रों को भी नए सत्र में पहले की तुलना में ज्यादा शुल्क देना होगा।
NEET UG 2026-27 काउंसलिंग में लागू होगी नई फीस
मध्य प्रदेश में NEET UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने 2026 सत्र के लिए संशोधित काउंसलिंग कार्यक्रम भी जारी किया है।
ऐसे में MBBS या BDS में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए कॉलेज चुनते समय केवल कटऑफ और सीट ही नहीं, बल्कि पूरे कोर्स की फीस, हॉस्टल और अन्य संस्थागत खर्च को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा। निजी कॉलेजों में घोषित ट्यूशन फीस के अलावा कुछ अन्य शुल्क अलग से हो सकते हैं।
सरकारी और निजी कॉलेज की फीस में कितना अंतर?
सीधे शब्दों में देखें तो सरकारी कॉलेज में सालाना MBBS फीस 1.14 लाख रुपए, जबकि निजी कॉलेज में करीब 18.08 लाख रुपए है। यानी निजी कॉलेज की सालाना फीस सरकारी कॉलेज की तुलना में करीब 16 गुना है।
यही वजह है कि NEET UG में सरकारी मेडिकल कॉलेज की सीट हासिल करना छात्रों के लिए सिर्फ प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि परिवार के लिए आर्थिक रूप से भी बड़ा फायदा है।
फीस का सीधा हिसाब
- सरकारी मेडिकल कॉलेज: ₹1.14 लाख सालाना
- निजी मेडिकल कॉलेज: करीब ₹18.08 लाख सालाना
- पिछले साल निजी MBBS फीस: करीब ₹16.50 लाख
- निजी MBBS फीस में बढ़ोतरी: करीब ₹1.58 लाख
- निजी कॉलेजों में NRI फीस: करीब ₹33.9 लाख से ₹53.5 लाख
- BDS फीस: करीब 8% तक बढ़ोतरी
फीस में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब NEET UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसलिए मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अब NEET स्कोर के साथ कॉलेज की फीस और सीट की श्रेणी को समझना भी उतना ही जरूरी हो गया है।
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