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एमपी सरकार का बड़ा फैसला, भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए जारी हुए नए नियम

18 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एमपी सरकार का बड़ा फैसला, भोपाल और इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए जारी हुए नए नियम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल और इंदौर-उज्जैन को मेट्रोपॉलिटन रीजन के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इसके लिए मध्य प्रदेश महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम, 2026 जारी कर दिए हैं।


नए नियमों के तहत दोनों मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए अलग-अलग 45 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी बनाई जाएगी। विकास योजना, निवेश, परिवहन व्यवस्था और परियोजनाओं के संचालन से जुड़े प्रावधान भी तय कर दिए गए हैं।


45 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी का होगा गठन

प्रत्येक मेट्रोपॉलिटन रीजन में 45 सदस्यीय योजना समिति बनेगी, जिसमें—

  • 30 सदस्य मतदान के जरिए चुने जाएंगे।

  • चुनाव संबंधित क्षेत्र की नगरपालिकाओं और पंचायतों के बीच जनसंख्या के अनुपात के आधार पर होगा।

  • निर्वाचित नगर निकाय सदस्य और पंचायत अध्यक्ष इन सदस्यों का चयन करेंगे।

  • 15 पदेन सदस्य शामिल रहेंगे।

  • 9 सदस्य को-ऑप्ट किए जाएंगे।

  • विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ विशेष आमंत्रित सदस्य होंगे।



मुख्यमंत्री होंगे अध्यक्ष

नई व्यवस्था के अनुसार—

  • समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे।

  • नगरीय विकास मंत्री उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाएंगे।

  • मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर समिति के सदस्य सचिव होंगे।

  • समिति की बैठक हर 6 महीने में आयोजित की जाएगी।


यदि किसी सदस्य का किसी मामले में आर्थिक हित पाया जाता है तो राज्य सरकार उसे समिति से हटा सकेगी।


विकास योजना में संशोधन का अधिकार सरकार के पास

मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए महानगर विकास एवं निवेश योजना तैयार की जाएगी। इसके प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित होंगी, जिनकी जांच एक समिति करेगी। प्रक्रिया पूरी होने पर योजना का गजट नोटिफिकेशन जारी होगा।


राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर, समिति या मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के अनुरोध पर अथवा संघ और राज्य सरकार की प्रस्तावित योजनाओं के लिए विकास योजना में संशोधन भी कर सकेगी।


कमिश्नर होंगे अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी

मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के लिए राज्य सरकार एक कमिश्नर नियुक्त करेगी। यही अधिकारी प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) होंगे और प्राधिकरण के प्रस्तावों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा सदस्य (अभियांत्रिकी) सहित अन्य अधिकारियों की नियुक्ति भी की जाएगी।


पीपीपी मॉडल पर भी चल सकेंगी परियोजनाएं

नियमों के अनुसार मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी अपनी संपत्तियों का आवंटन ऑनलाइन बोली या पूर्व निर्धारित मूल्य पर लॉटरी के माध्यम से कर सकेगी।


सरकार की पूर्व अनुमति मिलने पर विकास परियोजनाओं को पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल या अन्य उपयुक्त माध्यम से भी लागू किया जा सकेगा।


अन्य प्रमुख प्रावधान

  1. विकास अनुज्ञा से जुड़े शुल्कों के संग्रह और वसूली की प्रक्रिया तय की जाएगी।

  2. हर वर्ष 10 मार्च तक कमिश्नर वार्षिक आय-व्यय का विवरण और वार्षिक योजना प्रस्तुत करेंगे।

  3. मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से जुड़े मामलों में अपील नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव के समक्ष की जा सकेगी।

  4. ऐसी अपीलों का निस्तारण 120 दिन के भीतर किया जाएगा।

  5. विकास कार्य पूर्ण होने के बाद मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी संबंधित परियोजनाओं के लिए उपभोक्ता प्रभार भी वसूल सकेगी।


15 सदस्यीय एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण भी बनेगा

सरकार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण का गठन करेगी। इसमें संबंधित विभागों के सचिव, नगर निगम आयुक्त और अन्य अधिकारी सदस्य होंगे। यह प्राधिकरण पूरे मेट्रोपॉलिटन रीजन के लिए परिवहन संबंधी योजनाएं तैयार करेगा।

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