
भोपाल। मध्य प्रदेश में बच्चियों के लापता होने के मामले लगातार पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 2026 में अगस्त तक 9760 नए प्रकरण दर्ज हुए, जबकि पुराने मामलों को मिलाकर पुलिस के सामने 12387 केस थे।
पुलिस ने इनमें से 9084 बच्चियों को तलाश लिया, लेकिन 3303 बच्चियां अभी भी लापता हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में गुम होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में करीब तीन गुना है।
पुराने मामलों का बोझ भी बना हुआ है
पुलिस के रिकॉर्ड में इस साल दर्ज नए मामलों के साथ पिछले वर्ष के लंबित प्रकरण भी शामिल हैं। 2627 पुराने मामलों को जोड़ने के बाद कुल संख्या 12387 तक पहुंची थी।
पुलिस की तलाश के बाद 9084 बच्चियों का पता लगाया गया। इसके बावजूद लंबित मामलों की संख्या 3303 रह गई है।
पांच साल के आंकड़ों में भी बड़ी संख्या लंबित
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में हर साल बड़ी संख्या में बच्चियों के नहीं मिलने की स्थिति सामने आई है।
- 2021: वर्षांत में 2830 बच्चियां लापता
- 2022: 2944 बच्चियां लापता
- 2023: 3764 बच्चियां लापता
- 2024: 4001 बच्चियां लापता
- 2025: लंबित मामलों सहित 14520 बच्चियों की तलाश में सफलता
- 2025 के अंत में: 2627 मामले लंबित
- 2026 में अगस्त तक: लंबित संख्या बढ़कर 3303
2024 में वर्षांत पर लंबित बच्चियों की संख्या इन पांच वर्षों में सबसे ज्यादा 4001 दर्ज की गई थी।
हर महीने जिलों की हो रही समीक्षा
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की महिला शाखा गुमशुदा बच्चियों से जुड़े मामलों की नियमित निगरानी कर रही है। इसके लिए जिलों के स्तर पर प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की जाती है।
समीक्षा व्यवस्था में प्रमुख तौर पर ये कदम शामिल हैं:
- मासिक समीक्षा बैठक: जिलावार गुमशुदगी के मामलों की स्थिति देखी जाती है।
- ग्रेडिंग सिस्टम: लंबित मामलों के आधार पर जिलों को तीन श्रेणियों में रखा जाता है और एसपी को उनकी स्थिति से अवगत कराया जाता है।
- विशेष समीक्षा: कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों की अलग समीक्षा की जाती है।
- वन-टू-वन चर्चा: डीजी संबंधित जिलों के अधिकारियों से व्यक्तिगत स्तर पर चर्चा करते हैं।
93 फीसदी से ज्यादा मामलों में पुलिस को सफलता
गुमशुदा बालिकाओं के मामलों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने की बात पुलिस की ओर से कही गई है। इस साल दर्ज कुल प्रकरणों में करीब 93 प्रतिशत से अधिक मामलों में सफलता मिलने का दावा किया गया है।
लंबित मामलों की भी संबंधित जिलों से लगातार पड़ताल कराई जा रही है और उनकी निगरानी जारी है।
स्पेशल अधिकारी अनिल कुमार के अनुसार, गुमशुदा बालिकाओं के मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है और लंबित प्रकरणों पर संबंधित जिलों से जानकारी ली जा रही है।
इंदौर और धार समेत जिलों में सबसे ज्यादा मामले
सितंबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों में कई जिलों में गुमशुदा बच्चियों के मामलों की संख्या अधिक दर्ज हुई है।
इंदौर: 772
धार: 559
जबलपुर: 504
भोपाल: 493
सागर: 439
रतलाम: 417
इन आंकड़ों में इंदौर सबसे ऊपर है, जहां 772 मामले दर्ज हैं। इसके बाद धार में 559, जबलपुर में 504, भोपाल में 493, सागर में 439 और रतलाम में 417 मामले हैं।
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