
भोपाल। मध्यप्रदेश के दूरदराज़ गांवों और टोलों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब हजारों बस्तियां पक्की सड़कों से जुड़ने जा रही हैं, जिससे सफर आसान और विकास तेज होगा।
7 हजार से ज्यादा सड़कों का बड़ा नेटवर्क तैयार
राज्य सरकार ने 7135 नई सड़कों के निर्माण का प्लान तैयार किया है। यह काम ‘सुगम संपर्कता परियोजना’ के तहत होगा, जिससे प्रदेश के मजरे, टोले और सांदीपनि स्कूल सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि इस योजना के लिए जमीन पर तैयारी भी शुरू हो चुकी है—अब नजर इसकी रफ्तार पर है।
1000 करोड़ खर्च, हजारों गांवों को मिलेगा फायदा
इस महत्वाकांक्षी योजना पर करीब ₹1000 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसका सीधा फायदा उन बस्तियों को मिलेगा, जहां अब तक सड़क सुविधा नहीं पहुंच पाई थी। सरकार का लक्ष्य है कि 100 से ज्यादा आबादी वाले सभी मजरे-टोले सड़क से जुड़ें। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी—लेकिन योजना सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं है।
29 जिलों में 1771 नई सड़कों को मंजूरी
प्रदेश के 29 जिलों में पहले ही 1771 नई सड़कों के प्रस्ताव जिला स्तर पर मंजूर किए जा चुके हैं। यह दिखाता है कि योजना तेजी से जमीन पर उतर रही है। हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपये तक की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर काम में तेजी आएगी—और देरी की समस्या कम होगी।
ड्रोन और सॉफ्टवेयर से होगी सड़कों की निगरानी
इस परियोजना में आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल होगा। सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा सिपरी सॉफ्टवेयर के जरिए न सिर्फ DPR तैयार होगी, बल्कि पुल-पुलियों की स्थिति की भी निगरानी की जाएगी। यानी पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर फोकस रहेगा—जो इस योजना को खास बनाता है।
जियो-इंवेंट्री से खत्म होगा दोहराव का खतरा
पहले से बनी सड़कों का डेटा अब डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की संभावना खत्म होगी। अब तक 33,655 सड़कों में से 17,437 सड़कों की जियो-इंवेंट्री पूरी हो चुकी है। वहीं 9 जिलों में 80% से ज्यादा सर्वे हो चुका है, जिसमें रतलाम, जबलपुर और मंदसौर जैसे जिले आगे हैं—जो इस योजना की गति दिखाते हैं।
ग्रामीण जीवन में आएगा बड़ा बदलाव
यह परियोजना सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन की दिशा बदलने वाली पहल है। सड़कें बनने से गांवों तक एंबुलेंस, स्कूल बस और बाजार की पहुंच आसान होगी। आने वाले समय में यह योजना प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे सकती है—और यही इसका सबसे बड़ा असर होगा।
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