
भोपाल। मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। ड्रग्स तस्करी जिसे लंबे समय तक पुरुषों का नेटवर्क माना जाता था, उसमें अब महिलाएं भी आगे आ चुकी हैं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि महिलाएं सिर्फ ड्रग्स की ढुलाई नहीं कर रहीं, बल्कि सप्लाई से लेकर डिलीवरी तक पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रही हैं।
ड्रग्स नेटवर्क में महिलाओं की बढ़ती भूमिका
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बीते 5 वर्षों में ड्रग्स तस्करी के मामलों में 43 महिलाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। खास बात यह है कि अब ये महिलाएं केवल कूरियर की भूमिका में नहीं हैं, बल्कि कई मामलों में नेटवर्क को ऑपरेट करने वाली मुख्य कड़ी बन चुकी हैं। पूछताछ के दौरान महिला तस्करों से कई बड़े ड्रग्स रैकेट का भी खुलासा हुआ है।
कई राज्यों से मध्य प्रदेश तक पहुंचता है नशे का जाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश से गांजा, एमडी (MD) और अन्य खतरनाक ड्रग्स मध्य प्रदेश में लाए जाते हैं। तस्करी के प्रमुख रूट विशाखापट्टनम, बस्तर और नागपुर से होते हुए भोपाल और इंदौर तक फैले हुए हैं। पुरुष तस्करों की गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क सक्रिय रहता है, क्योंकि अब महिलाएं रणनीतिक तौर पर आगे लाई जा रही हैं।
कम शक, ज्यादा फायदा: महिलाओं को बनाया जा रहा ढाल
भोपाल क्राइम ब्रांच का कहना है कि महिलाओं पर आमतौर पर शक कम किया जाता है। बस, ट्रेन और अन्य सार्वजनिक परिवहन में उनकी तलाशी भी सीमित होती है। तस्कर इसी कमजोरी का फायदा उठाकर महिलाओं को ड्रग्स सप्लाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ मामलों में यह तस्करी पारिवारिक नेटवर्क के रूप में भी सामने आई है।
आंकड़े कर रहे हैं चौंकाने वाला खुलासा
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 में सिर्फ 2 महिलाएं ड्रग्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार हुई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 20 तक पहुंच गई। पुलिस का कहना है कि कई महिला तस्कर लीडरशिप रोल में हैं, जिन पर एक से अधिक केस दर्ज हैं। कुछ आरोपी महिलाएं फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
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