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मध्य प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ सरकार की नई रणनीति, हेल्पलाइन से लेकर कॉलेजों तक बदलेगा निगरानी का तरीका

23 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ सरकार की नई रणनीति, हेल्पलाइन से लेकर कॉलेजों तक बदलेगा निगरानी का तरीका
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अगले दो से तीन साल में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। सरकार ने तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के साथ शिक्षण संस्थानों, पुलिस, औद्योगिक इकाइयों और नशामुक्ति सेवाओं को इस मुहिम से जोड़ने की योजना बनाई है।


मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने गुरुवार को मंत्रालय में हुई पांचवीं राज्य स्तरीय एनसीओआरडी बैठक में संबंधित विभागों को समयबद्ध लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना समेत विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, विभागाध्यक्ष और पुलिस व नारकोटिक्स विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


दो से तीन साल में अवैध नेटवर्क खत्म करने की रणनीति

सरकार ने मादक पदार्थों के कारोबार पर कार्रवाई के लिए विभागवार कार्ययोजना बनाने को कहा है। मुख्य सचिव ने नक्सलवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए ड्रग्स के अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए भी साझा प्रयास करने पर जोर दिया।


तस्करी से जुड़ी सूचनाएं जुटाने की व्यवस्था मजबूत करने के साथ नारकोटिक्स वर्टिकल, विशेष शाखा और स्थानीय पुलिस के बीच तालमेल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान की प्रगति के लिए प्रत्येक विभाग को अपने आंतरिक लक्ष्य निर्धारित करने होंगे।


500 से अधिक विद्यार्थियों वाले कॉलेजों में बनेंगी समितियां

उच्च शिक्षण संस्थानों में नशे की रोकथाम के लिए शुरुआती चरण में उन संस्थानों में एंटी ड्रग समितियां बनाई जाएंगी, जहां विद्यार्थियों की संख्या 500 से ज्यादा है।


इन समितियों में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और उच्च शिक्षा, सामाजिक न्याय तथा पुलिस विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। संबंधित स्थानीय पुलिस थाने के बीट प्रभारी को समिति का नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।


सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में नशामुक्त विद्यालय अभियान भी चलाया जाएगा। इसके तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी।


नशे के अवैध कारोबार की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। इसके लिए नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार करने को कहा गया है।


मध्य प्रदेश में दो वर्षों में 2.74 लाख किलो ड्रग्स नष्ट

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, मादक पदार्थों के विनष्टीकरण में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2025 और 2026 में 30 सितंबर तक की कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:


- वर्ष 2025: 2,073 प्रकरणों में 1,44,025 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए।

- वर्ष 2026: 30 सितंबर तक 2,756 प्रकरणों में 1,30,380 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए गए।

- दोनों वर्षों का कुल: 2,74,405 किलोग्राम।


इसके अतिरिक्त, 30 सितंबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के 2,986 मामलों में 4,091 आरोपियों से कुल 50,933 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए।


446 करोड़ की संपत्ति अटैच, 18 गुप्त लैब पर कार्रवाई

ड्रग्स के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की आर्थिक गतिविधियों पर भी कार्रवाई की गई है। वर्ष 2025 में एनडीपीएस के 54 मामलों में 300 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच हुई, जबकि 2026 में 38 मामलों में 146 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई। दोनों वर्षों की कुल राशि 446 करोड़ रुपये है।


वर्ष 2025-26 के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व आसूचना निदेशालय और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने मिलकर प्रदेश में 18 गुप्त प्रयोगशालाओं को ध्वस्त किया।


सितंबर 2026 तक एनडीपीएस के 201 विशेष मुकदमों की निगरानी की गई। इसी अवधि में न्यायालयों में लंबित मामलों में आठ प्रकरणों में दोषसिद्धि हुई।


प्रीकर्सर रसायनों और कोडीन कफ सिरप पर बढ़ेगी निगरानी

रासायनिक कारखानों में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों का अवैध उपयोग और दूसरी जगह भेजे जाने की गतिविधियां रोकने के लिए मुख्य सचिव ने निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है।


उद्योग, श्रम, स्वास्थ्य और गृह विभाग को निगरानी तंत्र या विशेष दस्ता तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों को औद्योगिक समूहों और उद्योग संगठनों की सूची भी साझा करनी होगी।


कोडीन आधारित कफ सिरप के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण से जुड़े नेटवर्क पर लगातार नजर रखी जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर जरूरी जानकारी जुटाएगा और लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर काम करेगा।


फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में भेजे गए एनडीपीएस नमूनों की जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर प्राप्त करने के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।


हर जिले में नशामुक्ति केंद्र खोलने की तैयारी

सरकार प्रदेश के सभी जिलों में नशामुक्ति केंद्र स्थापित करना चाहती है। सामाजिक न्याय विभाग को उन जिलों से 31 अक्टूबर तक प्रस्ताव लेने के निर्देश दिए गए हैं, जहां अभी ऐसे केंद्र उपलब्ध नहीं हैं।


बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में सामाजिक न्याय विभाग के 31 और स्वास्थ्य विभाग के 10 नशामुक्ति केंद्र संचालित हैं।


नशामुक्त घोषित क्षेत्रों की जानकारी संबंधित कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों के साथ साझा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।


जागरूकता कार्यक्रमों में 2.58 करोड़ लोगों की भागीदारी

प्रदेश में नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 30,339 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें करीब 2.58 करोड़ लोगों ने भाग लिया।


'नशे से दूरी है जरूरी' अभियान को सोशल मीडिया पर भी व्यापक पहुंच मिली। अभियान की सामग्री को 58 करोड़ से अधिक बार देखा गया। युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयासों के तहत करीब 10 हजार युवाओं को विभिन्न खेल गतिविधियों से जोड़ा गया।


मुख्य सचिव ने विभागों को कार्रवाई, निगरानी, जनजागरूकता और नशामुक्ति सेवाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की योजना अवैध तस्करी पर नियंत्रण के साथ युवाओं को नशे से बचाने और नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार व पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

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