
भोपाल। मध्य प्रदेश में निगम, मंडल और बोर्ड के नए अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को अब सिर्फ पद नहीं, बल्कि सिस्टम चलाने का तरीका भी सिखाया जाएगा। हालिया रैली विवाद के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए भोपाल में विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम रखा है। 18 मई को भोपाल स्थित अटल बिहारी बाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में होने वाले इस कार्यक्रम में 63 नवनियुक्त गैर-सरकारी पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि ट्रेनिंग का फोकस सिर्फ कामकाज नहीं, बल्कि विवादों से बचाव पर भी रहेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे शुरुआत
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। सुबह 9 बजे से शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चलने वाले इस सेशन में सामान्य प्रशासन विभाग, वित्त विभाग और संस्थान के अधिकारी अलग-अलग विषयों पर प्रजेंटेशन देंगे। सरकार की कोशिश है कि निगम-मंडलों में नियुक्त नेताओं को शासन की प्रक्रिया, वित्तीय नियम और प्रशासनिक सीमाओं की पूरी जानकारी दी जाए, ताकि आगे किसी तरह की असहज स्थिति न बने।
18 विभागों के वरिष्ठ अफसर रहेंगे मौजूद
सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश पर 18 विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। ये अधिकारी नए अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को निगम-मंडलों के संचालन, बजट प्रबंधन, नीतिगत फैसलों, अधिकारों और जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी देंगे। सरकार इसे “प्रशासनिक समन्वय” मजबूत करने की कवायद मान रही है।
रैलियों के बाद दिल्ली तक पहुंचा मामला
हाल ही में कई निगम-मंडल अध्यक्षों ने पदभार ग्रहण करने के दौरान बड़े वाहन काफिले और रैलियां निकाली थीं। इसको लेकर पार्टी संगठन में नाराजगी सामने आई और मामला दिल्ली तक पहुंच गया। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी नेतृत्व ने इसे अनुशासन से जोड़कर देखा। इसके बाद पार्टी ने डैमेज कंट्रोल शुरू किया। यही वजह है कि अब ट्रेनिंग के जरिए नेताओं को “मर्यादा और प्रक्रिया” दोनों समझाई जा रही हैं।
बीजेपी ने कार्रवाई भी की
रैली विवाद के बाद बीजेपी ने भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को पद से हटा दिया। वहीं, मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस जारी कर उनके अधिकार फिलहाल फ्रीज कर दिए गए हैं। सरकारी और संगठन स्तर पर हुए इन फैसलों को साफ संदेश माना जा रहा है कि पार्टी अब निगम-मंडल नियुक्तियों को लेकर ज्यादा सतर्क है।
मंत्रियों और अफसरों से टकराव रोकने पर फोकस
सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क दिख रही है कि निगम-मंडल अध्यक्षों और विभागीय मंत्रियों या अफसरों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति न बने। इसी वजह से ट्रेनिंग में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि किस पदाधिकारी की सीमा क्या है, निर्णय लेने की प्रक्रिया कैसी होगी और प्रशासनिक समन्वय कैसे बनाए रखना है।
किन नेताओं को मिली हैं नियुक्तियां?
सरकार अब तक कई बड़े नेताओं को आयोग, बोर्ड और विकास प्राधिकरणों में जिम्मेदारी दे चुकी है। इनमें प्रमुख नामों में रामकृष्ण कुसमरिया, जयभान सिंह पवैया, रामलाल रौतेल, रेखा यादव, प्रवीण शर्मा, रामनिवास रावत, सत्येन्द्र भूषण सिंह, महेंद्र सिंह यादव और गुड्डी आदिवासी शामिल हैं। इसके अलावा ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, विंध्य, चित्रकूट और रतलाम विकास प्राधिकरणों में भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। सरकार इन नियुक्तियों को संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने की रणनीति के तौर पर देख रही है।
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