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मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर अगला कदम क्या होगा? मोहन यादव ने दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल से मांगी कानूनी सलाह

13 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में 27% OBC आरक्षण पर अगला कदम क्या होगा? मोहन यादव ने दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल से मांगी कानूनी सलाह
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सरकार अब आगे की कानूनी रणनीति तय करने में जुटी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात कर हाईकोर्ट के फैसले के बाद उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा की।


सरकार के सामने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करने और जातिगत जनगणना के नतीजों का इंतजार करने जैसे रास्ते हैं। इस मुद्दे पर सभी दलों से चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की संभावना भी जताई गई है।


OBC आरक्षण पर कानूनी रास्ते तलाश रही सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार शाम कानूनी सलाह लेने दिल्ली पहुंचे थे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ उनकी बैठक देर रात तक चली, जिसमें कानून के अन्य जानकार भी मौजूद रहे।


बैठक में इस बात पर विचार हुआ कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण कानून रद्द होने के बाद सरकार किन कानूनी विकल्पों के जरिए आगे बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री ने उपलब्ध रास्तों और उनमें से प्रभावी विकल्पों के बारे में जानकारी मांगी।


सूत्रों के अनुसार, चर्चा केवल एक विकल्प तक सीमित नहीं रही। सरकार के सामने अलग-अलग रणनीतियों पर विचार किया गया और सॉलिसिटर जनरल ने संभावित कानूनी रास्तों का विवरण रखा।


9 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने रद्द किया था कानून

मध्य प्रदेश में OBC वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान वर्ष 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार लेकर आई थी। इस व्यवस्था के तहत वर्ष 2022 तक भर्ती प्रक्रिया में OBC अभ्यर्थियों को लाभ मिला था।


बाद में यह मामला कानूनी अड़चनों में फंस गया और 27 प्रतिशत आरक्षण में से 13 प्रतिशत हिस्से पर रोक लग गई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को 27 प्रतिशत आरक्षण कानून को रद्द कर दिया।


सुप्रीम कोर्ट जा सकती है मध्य प्रदेश सरकार

सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई तय करने के लिए जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने की संभावना है।


कानूनी मामलों के जानकारों के अनुसार, सरकार के सामने मुख्य रूप से दो रास्ते हैं:

- सुप्रीम कोर्ट का रुख: आरक्षण से जुड़े मामले में आगे कानूनी चुनौती देना।

- जातिगत जनगणना के नतीजों का इंतजार: आंकड़े सामने आने के बाद अगली रणनीति पर विचार करना।


इन विकल्पों में से सरकार किस रास्ते को अपनाएगी, इस पर अंतिम निर्णय की जानकारी इनपुट में नहीं दी गई है।


चुनावी राजनीति में भी अहम रहेगा OBC आरक्षण

मध्य प्रदेश में OBC वर्ग की बड़ी आबादी को देखते हुए आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस विषय पर आगामी चुनावों में विपक्ष के सवाल उठाने की संभावना जताई गई है।


OBC वर्ग से जुड़े संगठनों के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा जारी है। आरक्षण के भविष्य को लेकर सरकार का अगला कदम राजनीतिक और कानूनी, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होगा।


एक कैबिनेट मंत्री ने भी OBC आरक्षण को प्रदेश का बड़ा मुद्दा बताया। उनके मुताबिक, यह विषय पहले भी महत्वपूर्ण रहा है और आने वाले समय में भी चर्चा के केंद्र में बना रहेगा।

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