
भोपाल। स्वामित्व योजना में मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग ने पटवारी संवर्ग की पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। 1,050 पटवारियों के नाम वाली सूची तैयार कर जिलों से सेवा संबंधी रिकॉर्ड मांगा गया है।
पदोन्नति के लिए 1 जनवरी 2026 को 50 वर्ष से कम उम्र और जून 2007 या उससे पहले पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जैसी शर्तें लागू की गई हैं। पात्रता से जुड़े रिकॉर्ड 30 सितंबर 2026 सुबह 10 बजे तक जमा कराने के निर्देश हैं।
पदोन्नति के लिए किन नियमों का आधार
राजस्व विभाग की यह कार्रवाई सामान्य प्रशासन विभाग के पदोन्नति नियम 2025 के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
इसके साथ मध्य प्रदेश भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त तृतीय श्रेणी अराजपत्रित (कार्यपालिक एवं तकनीकी) सेवा भर्ती नियम 2012 में 18 जून 2018 को किए गए संशोधन के प्रावधान भी लागू होंगे।
1050 नामों की सूची, रिकॉर्ड की जांच होगी
भू-संसाधन प्रबंधन कमिश्नर ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों से संबंधित पटवारियों की सेवा संबंधी जानकारी मंगाई है।
निर्देश के मुताबिक, अगर पात्र पटवारी का नाम जारी सूची में नहीं है तो उसका नाम भी जोड़ा जाना है।
पात्रता का आधार:
1 जनवरी 2026 को उम्र 50 वर्ष से कम।
पटवारी संवर्ग में नियुक्ति जून 2007 या उससे पहले।
सेवा संबंधी जानकारी और रिकॉर्ड उपलब्ध कराना।
30 सितंबर को सुबह 10 बजे तक देना होगा रिकॉर्ड
कलेक्टरों के माध्यम से संबंधित तहसीलदार या नायब तहसीलदार से पटवारियों की जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग ने रिकॉर्ड निर्धारित समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
समयसीमा: 30 सितंबर 2026, सुबह 10 बजे।
इसके बाद पात्रता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
स्वामित्व योजना में रजिस्ट्रीकर्ता बनाए जाने पर आपत्ति
स्वामित्व योजना के तहत पटवारियों को रजिस्ट्री से जुड़ी भूमिका दिए जाने पर उन्होंने कानूनी जवाबदेही का मुद्दा उठाया है। पटवारियों का कहना है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजी अधिकार लाभार्थी और शासन के बीच की प्रक्रिया हैं। उनके अनुसार, उन्हें निष्पादक या रजिस्ट्रीकर्ता की भूमिका देने से भविष्य में विवाद की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनी जिम्मेदारी का सवाल खड़ा हो सकता है।
जमीन के विवाद में कई बिंदु बन सकते हैं आधार
पटवारियों ने आबादी भूमि से जुड़े मामलों की जटिलता का भी मुद्दा उठाया है। उनके मुताबिक केवल नक्शा और खसरा देखकर हर मामले की स्थिति स्पष्ट नहीं होती।
विवाद की स्थिति में ये पहलू सामने आ सकते हैं:
वास्तविक कब्जा
वारिसों का अधिकार
सह-स्वामित्व
जमीन की चतुर्सीमा
पुराने दावे
अदालत में लंबित विवाद
पटवारियों की चिंता है कि बाद में किसी व्यक्ति द्वारा स्वामित्व को चुनौती दिए जाने पर रजिस्ट्री के निष्पादक के रूप में दर्ज अधिकारी भी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है।
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